ईरान को चीन का मिला सहारा, तेहरान पर नये अमेरिकी सैंक्शंस लगाने का किया विरोध

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वाशिंगटन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और बीजिंग से तेहरान के साथ अपने आर्थिक संबंध कम करने का आग्रह कर रहा है.

ईरान को काबू करने के लिए अमेरिका नये सैंक्शंस लगाने की तैयारी में है. इसके लिए वो चीन समेत दुनिया भर के देशों पर भी दबाव बना रहा है. अमेरिका की कोशिश है कि चीन सहित पूरी दुनिया में ईरान अलग-थलग पड़ जाए और उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो जाए. अब चीन ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

चीन का कहना है कि अमेरिका के आर्थिक दबाव से मध्य पूर्व का विवाद हल नहीं होगा. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान का कहना है कि अमेरिका की ओर से आर्थिक दबाव का नया दौर मध्य पूर्व के विवाद को सुलझाने में मदद नहीं करेगा.

शुक्रवार को बीजिंग में एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में लिन ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव से इस मुद्दे को सुलझाने में मदद नहीं मिलेगी. उन्होंने सभी पक्षों से तनाव को राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से सुलझाने का आग्रह किया. चीन ने बार-बार अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों को खारिज किया है. उसका तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मंज़ूरी न पाने वाले ऐसे कदमों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं होता.

लिन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वाशिंगटन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और बीजिंग से तेहरान के साथ अपने आर्थिक संबंध कम करने का आग्रह कर रहा है.

जंग का आखिरी हथियार?

ट्रंप प्रशासन तेहरान के खिलाफ़ ज़बरदस्त आर्थिक अभियान चलाने की बात कर रहा है. वे उस देश के खिलाफ़ “आर्थिक D-Day” (निर्णायक आर्थिक हमले) का दावा कर रहे हैं, जिसने अब तक अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों का लगभग पांच दशकों तक सामना किया है. बहुत कम जानकारी के साथ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते घोषणा की कि अमेरिका ईरान पर “अभूतपूर्व” स्तर की आर्थिक घेराबंदी और अलगाव लागू करेगा. इसका मकसद ईरान के नेतृत्व को मजबूर करना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और तेल व प्राकृतिक गैस टैंकरों के लिए अहम ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ को पूरी तरह से खोलने की मांगों को मान ले.

ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने वाले देशों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई होगी. इसमें बैंक, कंपनियां, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं. उन्होंने तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करने और कैश ट्रांसफर, करेंसी एक्सचेंज, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को रोकने की बात कही. माना जा रहा है कि ये ट्रंप का आखिरी हथियार है, मगर चीन की तरफ से इस फैसले के विरोध ने इसकी ताकत कमजोर कर दी है.

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