चीन का सस्ता सामान बन रहा दुनिया के लिए चुनौती, रिपोर्ट में चिंता- ‘डंपयार्ड’ बन रहा यूरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपना सस्ता सामान यूरोप में ‘डंप’ कर रहा है. इससे यूरोप की कंपनियों को नुकसान हो रहा है.चीन दुनियाभर में अगर किसी एक चीज के लिए जाना जाता है तो वह है उसका सस्ता सामान. इसी सस्ते सामान ने चीन को दुनिया की ‘फैक्ट्री’ बना दिया है, क्योंकि वह जो कुछ बनाता है, उसे कम कीमत पर दूसरे देशों को बेच देता है. नतीजा यह होता है कि चीन का तो सामान बिकता रहता है लेकिन दूसरे देशों की कंपनियों को नुकसान होने लगता है. अब एक नई रिपोर्ट आई है, जो बताती है कि यूरोप चीन के सस्ते सामानों का ‘डंपयार्ड’ बन गया है.

फ्रेंच अखबार ‘ले मोंडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ (EU) अब एक ऐसी ‘रणनीति’ बनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. यानी, चीन के साथ न तो कोई ट्रेड वॉर शुरू हो और उसकी अपनी कंपनियों को भी फायदा हो.

अखबार लिखता है कि चीन अब तक सस्ता सामान तो बेच ही रहा था लेकिन अब वह इनोवेशन और हाई वैल्यू वाला प्रोडक्शन भी कर रहा है, जिसमें AI भी शामिल है. इन सबके कारण यूरोपीय कंपनियों को नुकसान हो रहा है.

क्या कर रहा है चीन?

रिपोर्ट कहती है कि ग्लोबल मैनुफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी लगभग 30% है. जबकि खपत में उसकी हिस्सेदारी सिर्फ 13% है. इसका मतलब हुआ कि चीन जितनी मैनुफैक्चरिंग कर रहा है, उसका आधे से भी कम खुद इस्तेमाल करता है और उससे ज्यादा बेच देता है.चीन है कि मानता नहीं…!

चीन के सस्ते सामान को आने से तो रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसके सामान को महंगा जरूर किया जा सकता है. मगर इन सबका असर भी चीन पर नहीं हो रहा है.

यूरोप ने चीन की इलेक्ट्रिक कारों पर 2024 में टैरिफ लगाए थे, ताकि उसकी गाड़ियों को महंगा किया जा सके. यूरोप ने चीनी कंपनी BYD 17%, Geely पर 18.8% और SAIC पर 35% से ज्यादा टैरिफ लगा दिया था.

लेकिन, ये टैरिफ यूरोपीय बाजार में चीनी ‘घुसपैठ’ को कम करने में काफी हद तक नाकाम रहे.

‘अटलांटिक काउंसिल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 और 2025 के बीच यूरोप में चीनी कारों का निर्यात 26% बढ़कर गया है. 2025 में चीन ने 12 लाख से ज्यादा गाड़ियां निर्यात की थीं.

अब क्या कर रहा है यूरोप?

यूरोप चीन को न तो छोड़ना चाहता है और न उसके साथ बने रहना चाहता है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर बीजेपी बढ़ते ट्रेड इम्बैलेंस को कम नहीं करता है तो यूरोप को आखिरकार चीन से ‘अलग’ होने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जुलाई EU टैरिफ-फ्री स्टील कोटा में 47% की कटौती करेगा. इससे टैरिफ फ्री वाला स्टील 3.3 करोड़ टन से घटकर 1.83 करोड़ टन हो जाएगा. इसके अलावा, 2031 तक EU स्टील पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 25% से बढ़ाकर 50% करने की योजना भी बना रहा है.

बताया जा रहा है कि EU अब पारंपरिक व्यापार सुरक्षा उपायों से आगे बढ़कर औद्योगिक नीति की ओर बढ़ रहा है. चर्चा है कि अपनी इंडस्ट्रीज को मजबूत बनाने के लिए यूरोप अब ‘ओवरकैपेसिटी इंस्ट्रूमेंट’ वाला सिस्टम लाने वाला है. इसका मतलब होगा कि अगर चीन अपना सस्ता सामान ‘डंप’ करता है तो यूरोप कड़े कदम उठा सकता है.