इजरायल जासूसी की बात से मना कर रहा है और पेंटागन इस मसले पर चुप्पी साधे हुए है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सात पेजों के आदेश में जासूसी के कई उदाहरण भी देखे हैं.दो अमेरिकी अधिकारियों और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, पेंटागन इजरायल की तरफ से अमेरिका पर की जा रही जासूसी में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर चिंतित है. हाल ही में पेंटागन ने इजलायल की तरफ से खुफिया जानकारी हासिल करने के खतरे के स्तर को टॉप लेवल तक बढ़ा दिया है. मतलब इजरायल को सबसे बड़ा खतरा बता दिया है.
किसकी जासूसी कर रहा इजरायल?
एनबीसी न्यूज के अनुसार, पेंटागन की रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) ने एक नया प्रति-खुफिया खतरे का आकलन जारी किया है. अधिकारियों ने बताया कि डीआईए ने एक इंटरनेल मैसेज प्रकाशित किया, जिसे एक मौजूदा अधिकारी ने देखा, जिसमें इजरायल के लिए खतरे का स्तर “गंभीर” बताया गया है. अधिकारियों ने कहा कि यह आकलन पेंटागन के भीतर इस चिंता से उपजा है कि इजरायल ईरान युद्ध पर ट्रंप प्रशासन की आंतरिक चर्चाओं और निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों की निगरानी करने का विशेष प्रयास कर रहा है.
अमेरिका के एक मौजूदा अधिकारी के अनुसार, डीआईए के आकलन में सात पेज का एक दस्तावेज और एक चार्ट शामिल है. अधिकारी के मुताबिक, दस्तावेज में कहा गया है कि इजरायल की मानव जासूसी और तकनीकी डेटा संग्रह करने की क्षमता “गंभीर स्तर” पर है. अधिकारी ने यह भी बताया कि इसमें कई विशिष्ट घटनाओं का उल्लेख है, जिनसे अमेरिका की चिंताएं बढ़ गई हैं.
वाशिंगटन डीसी स्थित इजरायली दूतावास के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि यह कहना “पूरी तरह गलत” है कि इजरायल अमेरिका की जासूसी करता है. प्रवक्ता ने कहा, “इजरायल अमेरिकी संस्थाओं, यहां तक कि अमेरिकी सरकारी अधिकारियों की भी खुफिया जानकारी इकट्ठा नहीं करता है. इजरायल की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिशें उसके दुश्मनों पर केंद्रित हैं, ना कि उसके सहयोगियों पर. इसके विपरीत कोई भी दावा या तो गलत जानकारी पर आधारित है या राजनीतिक रूप से प्रेरित है.”
अमेरिका का जवाब
पेंटागन ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने एक बयान में कहा, “यह पूरी कहानी झूठी है और इसका स्रोत वह व्यक्ति है, जिसे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है.” राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (जो डीआईए सहित सभी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की देखरेख करता है) ने भी टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया.क्या ऐसा होता है
दुनिया भर में सहयोगी और विरोधी देशों का एक-दूसरे पर जासूसी करना आम बात है. लेकिन वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इजरायल के हालिया प्रयास सामान्य और अपेक्षित जासूसी से कहीं आगे निकल गए हैं. अधिकारियों को यह नहीं पता था कि किसी विशिष्ट घटना के कारण डीआईए ने काउंटर इंटेलिजेंस खतरे के स्तर को बढ़ाने का निर्णय लिया है या नहीं.
इजरायल क्यों कर रहा ऐसा
अभी हाल ही में खबर आई थी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के साथ युद्ध और लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियानों को लेकर मतभेद बढ़ गए हैं. पिछले सप्ताह हुई एक तनावपूर्ण फोन कॉल के बाद ट्रंप ने पत्रकारों के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने कॉल के दौरान नेतन्याहू को “पागल” कहा था, क्योंकि इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या मध्य पूर्व में दोनों देशों के उद्देश्य काफी हद तक अलग होने लगे हैं.
अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम लागू होने के बाद से, ट्रंप ईरान के साथ राजनयिक समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के बीच शुरू हुए युद्ध को समाप्त किया जा सके. इजरायल ने सार्वजनिक रूप से संदेह व्यक्त किया है कि ईरान किसी भी समझौते का पालन करेगा. पश्चिमी अधिकारियों के अनुसार, नेतन्याहू ईरान के खिलाफ बमबारी फिर से शुरू करने पर जोर दे रहे हैं और ट्रंप से असहमत हैं, जिन्होंने उन पर लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ हमलों को कम करने का दबाव डाला है.
अमेरिका की क्या है रणनीति
मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों और बाहरी विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल इस बात में गहरी दिलचस्पी रखता है कि ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान फिर से शुरू करने का फैसला करते हैं या संघर्ष को समाप्त करने का. मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि पेंटागन के लिए सबसे व्यावहारिक परिणाम यह होगा कि अमेरिकी अधिकारी इजरायल की यात्रा करते समय या इजरायली अधिकारियों से मुलाकात करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतेंगे. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच दैनिक आधार पर होने वाली उच्च स्तरीय खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान पर, विशेष रूप से ईरान युद्ध से संबंधित जानकारी पर, कोई प्रभाव पड़ता हुआ प्रतीत नहीं होता है.