‘हमसे भारी भूल हो गई…’, होर्मुज में हमले को लेकर ईरान ने क्या मान ली गलती, रिपोर्ट में दावा

ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ओमान में होने वाली शनिवार की बैठक के बाद वे ईरान से सिर्फ एक ही रुख की उम्मीद करते हैं और वो है होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोल दिया जाए.ईरान ने बंद कमरे में मान लिया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमला करके बहुत बड़ी गलती की है. ये दावा अमेरिकी अधिकारियों ने सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में की है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने निजी तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों से संपर्क किया और कहा, “हमसे चूक हो गई. कृपया बातचीत का सिलसिला टूटने न दें, हम आगे भी बात जारी रखना चाहते हैं.”

ईरानी अधिकारियों ने इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए अमेरिकी बातचीत दल को सफाई दी है. ईरान का कहना है कि यह हमला उनकी सरकार या मुख्य सेना का फैसला नहीं था. बल्कि, ईरान के ही भीतर मौजूद कट्टरपंथियों के एक ‘भटके हुए गुट’ ने इस पूरी साजिश को अंजाम दिया है.

सीबीएस न्यूज के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि यह गुट अमेरिका और ईरान के बीच होने जा रही शांति वार्ताओं और समझौतों को पूरी तरह से नाकाम करना चाहता है. अमेरिका अब चाहता है कि ईरान बंद कमरों से बाहर आए और सार्वजनिक रूप से अपनी इस गलती को स्वीकार करे.

ट्रंप की ‘सुपर टीम’ संभालेगी कमान, ओमान में आज महाबैठक
इस पूरे तनाव के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी एक बेहद ताकतवर और करीबी टीम को इस मामले को सुलझाने के काम पर लगा दिया है. इस टीम की कमान खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभाल रहे हैं. उनके साथ ट्रंप के दामाद जरेड कुशनर, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल हैं. ट्रंप ने इस टीम को साफ निर्देश दिए हैं कि वे ईरान के साथ बातचीत को आगे बढ़ाएं.इसी सिलसिले में आज यानी शनिवार को ओमान में दोनों पक्षों के बीच एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक होने जा रही है. अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पर्दे के पीछे की कहानी बताते हुए कहा, “वे (ईरानी अधिकारी) हमारे पास वापस आए और बोले ‘हमसे भारी गड़बड़ हो गई, हमसे गलती हुई है. चलिए, बातचीत जारी रखते हैं.’

क्यों हुआ था हमला?
ईरान भले ही इसे कट्टरपंथियों की करतूत बता रहा हो, लेकिन अमेरिकी खुफिया और रणनीतिक टीम की रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां करती है अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, असल मुद्दा व्यापारिक रास्तों का था. दोनों देशों के बीच हुए शुरुआती समझौते के तहत अमेरिका का मानना था कि ओमान के तट से लगने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य का ‘दक्षिणी रास्ता’ व्यापार के लिए पूरी तरह खुला रहेगा.

लेकिन जब व्यापार शुरू हुआ, तो ईरान यह देखकर दंग रह गया कि इस रास्ते से तेल और गैस के जहाजों का ट्रैफिक उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी और भारी मात्रा में गुजर रहा है. इस भारी ट्रैफिक को देखकर ईरान घबरा गया और अपनी बात से मुकरते हुए उसने जहाजों को निशाना बना डाला.

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