‘मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी,’ अर्जेंटीना के स्टार ने इंटरनेशनल फुटबॉल से लिया संन्यास

अर्जेंटीना के डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का ऐलान कर दिया है. ओटामेंडी ने अर्जेंटीना के लिए 139 मैच खेले और फीफा वर्ल्ड कप तथा दो कोपा अमेरिका खिताब जीते. उन्होंने अपने विदाई संदेश को अपने करियर का सबसे मुश्किल पल बताया.

अर्जेंटीना के स्टार डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह गर्व के साथ फुटबॉल से विदा ले रहे हैं.  38 वर्षीय डिफेंडर के अनुसार, उन्होंने नेशनल टीम की जर्सी पहनते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास किया. इस अनुभवी सेंटर-बैक खिलाड़ी ने 17 साल से ज्यादा समय तक अर्जेंटीना की ओर से खेलने के बाद रिटायरमेंट की घोषणा की है.

चार फीफा वर्ल्ड कप में देश का प्रतिनिधित्व किया

ओटामेंडी ने अर्जेंटीना के लिए 139 मैच खेले और फीफा वर्ल्ड कप तथा दो कोपा अमेरिका खिताब जीते. उन्होंने अपने विदाई संदेश को अपने करियर का सबसे मुश्किल पल बताया. अर्जेंटीना की ‘गोल्डन जेनरेशन’ के अहम खिलाड़ी ओटामेंडी ने चार फीफा वर्ल्ड कप में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया और देश के सबसे सफल डिफेंडरों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई।

ओटामेंडी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इंस्टाग्राम’ पर लिखा, ‘आज मुझे अपने पूरे करियर के सबसे मुश्किल शब्द लिखने पड़ रहे हैं. मैंने बहुत कम उम्र से ही अर्जेंटीना की नेशनल टीम की जर्सी पहनने का सपना देखा था; यह फुटबॉल से मिला मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान था. मैंने पूरी शिद्दत, गर्व और इस जिम्मेदारी के एहसास के साथ इसका बचाव किया कि लाखों अर्जेंटीना वासियों के लिए इसका क्या मतलब है.”

फाइनल मैच में खेला करियर का अखिरी मुकाबला

ओटामेंडी ने अर्जेंटीना के लिए अपना आखिरी मैच फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मैच के रूप में खेला. इस मुकाबले में अर्जेंटीना को स्पेन के हाथों 0-1 से हार का सामना करना पड़ा. निराशाजनक नतीजे के बावजूद, ओटामेंडी ने कहा कि उन्हें टीम की कोशिश पर गर्व है. ‘किस्मत को यही मंजूर था कि मेरा आखिरी मैच वर्ल्ड कप फाइनल हो.’उन्होंने लिखा, ‘नतीजा वैसा नहीं रहा जैसा हम चाहते थे, लेकिन मैं गर्व के साथ विदा ले रहा हूं क्योंकि मुझे पता है कि इस ग्रुप ने आखिरी सेकंड तक कोशिश की. उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं इस सुकून के साथ विदा ले रहा हूं कि मैंने मैदान पर अपना सब कुछ झोंक दिया. मैंने कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी, कभी भरोसा नहीं खोया और हमेशा यही महसूस किया कि यह जर्सी मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान थी.’

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