पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक पेश हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद बंगाल चौथा ऐसा राज्या होगा, जहां यह कानून बनेगा.पश्चिम बंगाल की शुवेंदु अधिकारी सरकार सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लिए विधेयक पेश कर सकती है. इस बिल के पास होने की पूरी संभावना है, क्योंकि विधानसभा में सरकार के पास पूर्ण बहुमत है. अगर ऐसा होता है कि पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का चौथा राज्य हो जाएगा. इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम समान नागरिक संहिता लागू कर चुके हैं. बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था.
समान नागरिक संहिता क्या है
समान नागरिक संहिता में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे निजी मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून लागू होते हैं, चाहे उनका धर्म कोई भी हो. संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को यूसीसी लागू करने की सलाह दी गई है. लेकिन आजादी के बाद सरकारों ने समान नागरिक संहिता की जगह अलग-अलग धर्मों को मानने वालों के लिए अलग-अलग पर्सनल कानून लागू किए. हालांकि जिन बीजेपी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू है, वहां आदिवासियों को इससे बाहर रखा गया है.
जिन राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू है, वहां विवाह के पंजीकरण, तलाक, गुजारा भत्ता (एलिमनी) और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण जैसे नियमों को एक समान बनाया गया है. पश्चिम बंगाल में यूसीसी कानून लागू होने के बाद वह सबसे बड़ा राज्य होगा, जिसने यूसीसी लागू किया है. वहां मुस्लिम आबादी करीब 30 फीसदी है.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस साल 10 अप्रैल को कोलकाता में बीजेपी का घोषणा-पत्र जारी करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में भी यूसीसी लागू किया जाएगा. उन्होंने कहा था,”अगर संविधान सभी नागरिकों को समान मानता है, तो फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि एक व्यक्ति को चार शादियां करने की अनुमति हो और दूसरे को केवल एक?”किस राज्य में कब लागू हुआ यूसीसी
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता 27 जनवरी 2025 से लागू है.गुजरात विधानसभा ने इस साल 24 मार्च ‘गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक 2026’ पारित किया था.मध्य प्रदेश ने समान नागरिक संहिता का मसविदा तैयार करने के लिए इस साल 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया है. गोवा में 1867 के पुर्तगाली सिविल कोड पर आधारित एक समान नागरिक कानून पहले से लागू है.असम की विधानसभा में 26 मई को समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक पारित किया था.
बीजेपी और समान नागरिक संहिता
बीजेपी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के तरीके में थोड़ा सा अंतर है. उत्तराखंड और गुजरात ने जहां इसे लागू करने से पहले विशेषज्ञ समितियों के जरिए अध्ययन करवाया और बाद में विधानसभा में बिल पेश कर उसे पारित करवाया. वहीं असम ने सीधे विधानसभा में समान नागरिक संहिता से जुड़ा बिल ही पेश कर दिया.
समान नागरिक संहिता बीजेपी का एक पुराना राजनीतिक मुद्दा रहा है. इसके अलावा अनुच्छेद 370 हटाना और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण भी उसके पुराने मुद्दे रहे हैं. इन मुद्दों को बीजेपी पूरा कर चुकी है. बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में देशभर में यूसीसी लागू करने का वादा किया था.
इस साल मई में घोषित पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य की 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 207 जीती थीं. वहीं विपक्षी तृणमूल कांग्रेस को 88 सीटें मिली थीं.इसके अलावा कांग्रेस, माकपा और दूसरे दलों ने छह सीटें जीती थीं. तृणमूल कांग्रेस के करीब 60 विधायक बागी हो चुके हैं. ऐसे में उनका इस विधेयक पर क्या रुख रहेगा,अभी यह स्पष्ट नहीं है.