PM को कोई दोस्त मानता है कोई भगवान, उन्हें गाली देना कूल नहीं बनाता… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर कंगना रनौत

छात्र प्रदर्शन पर कंगना रनौत की टिप्पणी, बोलीं- अश्लीलता और अनुशासनहीनता को सामान्य नहीं बनाया जा सकता.

हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन को लेकर बीजेपी सांसद कंगना रनौत का बयान सामने आया है. कंगना ने एक वीडियो मैसेज जारी कर कहा कि उन्होंने कुछ प्रदर्शनकारियों के उस व्यवहार का विरोध किया, जिसे वह अनैतिक, अश्लील और सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने प्रदर्शित किया जा रहा आचरण मानती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार को सामान्य नहीं बनाया जाना चाहिए और समाज इसे स्वीकार नहीं करता.

‘मैंने स्टार्टअप्स और युवाओं के काम को सराहा’

कंगना ने आरोप लगाया कि मीडिया उनके खिलाफ एकजुट होकर अभियान चला रही है और उनके उन बयानों को नहीं दिखा रही, जिनमें उन्होंने स्टार्टअप्स, युवाओं और नीट के छात्रों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि देश के कई युवा बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं और उनकी टीम तथा परिवार में भी ऐसे लोग हैं, जिन पर उन्हें गर्व है.

‘दूसरे की भावनाओं का आहत नहीं कर सकते’

कंगना ने कहा कि अनुशासन और मर्यादा कोई विकल्प नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘समाज और संविधान के दायरे में रहते हुए हर व्यक्ति को अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी को भी दूसरों की भावनाओं को आहत करने या सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक व्यवहार करने का अधिकार नहीं है.’

उन्होंने कहा कि चाहे किसी के आराध्य, भगवान, माता-पिता, बच्चे, नेता या प्रधानमंत्री हों, लोगों की उनसे भावनाएं जुड़ी होती हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए. कोई प्रधानमंत्री को दोस्त मानता है कोई भगवान मानता है. कंगना ने कहा कि दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या उसे आधुनिकता और ‘कूल’ होने का प्रतीक मानना सही नहीं है, बल्कि यह बुनियादी नागरिक समझ का विषय है.

कंगना ने लोगों से कहा कि वे ऐसे विचारों से प्रभावित न हों जो उन्हें उनके अनुसार गलत दिशा में ले जाते हैं. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन, परिवार और कार्यस्थल पर मर्यादा आवश्यक है और उसका पालन न करने पर व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.

कंगना ने कहा कि विज्ञान के अनुसार मानव जीवन का उद्देश्य इवोल्यूशन है और शास्त्र भी श्रेष्ठ बनने की प्रेरणा देते हैं. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में आगे बढ़ें, बेहतर बनें और पशुवत प्रवृत्तियों की ओर न जाएं.

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