चिराग पासवान ने कहा, ‘किसी के कहने से आरक्षण खत्म होने वाली चीज नहीं है. यह कोई खैरात भी नहीं है बल्कि संवैधानिक अधिकार है.’नई दिल्ली:
जंतर मंतर पर जातिगत आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर जुटी भीड़ पर राजनीति भी तेज हो गई है. यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रदर्शन में शामिल हर्ष दुबे समेत कई लोगों से मुलाकात की थी. अब इस मामले में बसपा प्रमुख मायावती और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का भी बयान आया है. मायावती ने ऐसे विरोध को संविधान के खिलाफ और समाज में समता को खत्म करने की साजिश बताया है. वहीं चिराग पासवान का कहना है कि आरक्षण के खिलाफ उठने वाली मांग पर कोई चर्चा नहीं हो सकती. उनका कहना है कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है और यह कोई खैरात नहीं है.
मायावती ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखकर इस मामले पर अपनी बात कही है. उन्होंने लिखा, ‘जंतर मंतर पर संविधान में एससी, एसटी व ओबीसी समाज को मिले आरक्षण के खिलाफ अभी हाल ही में जमा हुए कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई मांग कतई उचित व देशहित में नहीं है. उन्हें आरक्षण के संबंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुंचे.’
इसके साथ ही मायावती ने EWS वाला सवाल भी उठा दिया और कहा कि जहां तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है तो केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा भी गरीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है. किंतु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है. मायावती ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है. इसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के गरीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है. चिराग पासवान बोले- चर्चा का भी कोई सवाल नहीं उठता
वहीं इस संबंध में चिराग पासवान ने तो स्पष्ट कहा कि चर्चा का कोई सवाल ही नहीं उठता. चिराग पासवान ने कहा, ‘किसी के कहने से आरक्षण खत्म होने वाली चीज नहीं है. यह कोई खैरात भी नहीं है बल्कि संवैधानिक अधिकार है. इसके तहत यह सोच रही है कि ऐसे लोगों को मुख्यधारा में जोड़ा जाए, जिनके साथ किसी न किसी कारण से अत्याचार हुआ है. ऐसे लोगों को अनुसूचित जाति में रखा गया है और उन्हें आरक्षण दिया जा रहा है. ऐसे लोगों का रहन-सहन और वेशभूषा अलग है. उन्हें मुख्य धारा में लाने की भावना से आरक्षण मिला था. बाबासाहेब आंबेडकर ने यह आरक्षण दिया था और इसे सशक्त भी किया गया था. आज की तारीख में तो उच्च जाति से आने वाले गरीबों को भी आरक्षण का लाभ मिलता है. ऐसे में इतने विस्तृत दायरे वाले आरक्षण को कोई यूं ही खत्म कराना चाहे तो यह संभव नहीं है.’