सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने आज ही बताया है कि दमिश्क कई देशों की भागीदारी के साथ इजरायल के साथ सुरक्षा समझौता करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है.
ईरान के सु्प्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने आज साफ कर दिया है वो हिज्बुल्लाह के साथ खड़े हैं. ईरान का कहना है कि इजरायल के प्रभाव में शुरू की गई जंग के पांच महीने बाद अमेरिका फंसा हुआ है और संघर्ष कर रहा है और उसे निश्चित रूप से इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. खामेनेई कई बार बदला लेने की बात कर चुके हैं.
युद्ध का अभी का अपडेट
ट्रंप प्रशासन ने रविवार को बताया कि अब हवाई हमलों को रोक दिया गया है. इसे रोकने का मकसद बातचीत के लिए गुंजाइश बनाना था.साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि वे तनाव और बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. मगर असलियत ये है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप को समझाया कि अमेरिका के पास गोला-बारूद कम हो गया है और अगर ये ऐसे ही चलता रहा तो अमेरिका की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी. ईरान के सख्त रुख के बावजूद राजनयिक गतिविधियों के कुछ संकेत मिल रहे हैं. ईरान ने कहा है कि हाल के दिनों में उसने ओमान के साथ डिप्टी विदेश मंत्री स्तर पर बातचीत की है. लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि इस्लामिक रिपब्लिक अपनी होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखने की जिद से पीछे हटेगा. फिलहाल दोनों तरफ से हमले रुके हुए हैं.
क्यों ट्रंप ने शुरू किया नये प्लान पर काम
इस बीच पाकिस्तान, इराक और कतर अपनी तरफ से कूटनीतिक कोशिशें जारी रखे हुए हैं, मगर फिलहाल इसका कोई हल निकलता नहीं नजर आ रहा. इन सबके बीच ट्रंप अब पुराने प्लान पर काम करना शुरू कर चुके हैं. ट्रंप ने पूरी कोशिश कर ली कि वो ईरान में सत्ता परिवर्तन करवाकर अपनी जीत का ऐलान कर दें. मगर ऐसा नहीं हुआ. उसके बाद उन्होंने इजरायल को साइडलाइन कर बीच का रास्ता निकालने की भी कोशिश करके देख लिया. अब उन्हें समझ आ गया है कि अगर मध्य पूर्व में अमेरिका की ताकत का झंडा बुलंद करना है तो इजरायल को पूरी तरह सेफ करना होगा.
क्या है ट्रंप का नया प्लान
अब वो फिर से अब्राहम अकॉर्ड पर आ गए हैं. अब्राहम अकॉर्ड इजरायल और अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने वाला एक ऐतिहासिक समझौता है. इसकी शुरुआत ट्रंप के पहले कार्यकाल सितंबर 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई थी. इस समझौते से जुड़ने वाले देशों में संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकिस्तान हैं. अब ट्रंप सऊदी अरब पर दबाव डाल रहे हैं कि वो भी इस समझौते में शामिल हो. इसके बदले में अमेरिका से सऊदी अरब को नागरिक परमाणु समझौते का गिफ्ट मिलेगा. फिलहाल सऊदी अरब ने इस पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है पर सऊदी की मुश्किल ये है कि ईरान और हूतियों के निशाने पर वो भी है. पाकिस्तान से रक्षा समझौता होने के बाद भी उस पर हमले हुए. पाकिस्तान ने ईरान को समझाने से लेकर ट्रंप को धोखा देकर ईरान से गैर-कानूनी तौर पर तेल की डील की पर इसके बाद भी हमले नहीं रुके. ऐसे में सऊदी को अपनी सुरक्षा के लिए एक बार फिर अमेरिका की ओर ही देखना पड़ रहा है. अगर युद्ध या तनाव ज्यादा दिनों तक टिकता है तो देर-सवेर हो सकता है कि सऊदी भी अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हो जाए.
क्या ट्रंप को सफलता मिलेगी
सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने आज ही बताया है कि दमिश्क कई देशों की भागीदारी के साथ इजरायल के साथ सुरक्षा समझौता करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है. अल जजीरा के ‘अल मुकाबला’ कार्यक्रम में एक खास इंटरव्यू के दौरान अल-शरा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इजरायल के साथ यह समझौता व्यापक शांति का रास्ता खोल सकता है. इसी तरह लेबनान के साथ अमेरिका ने इजरायल का समझौता करा दिया है. जाहिर है हिज्बुल्लाह इससे खुश नहीं हैं, मगर अब उनकी मुसीबत बढ़ जाएगी. एक तरफ उन्हें लेबनान की सेना से लड़ना पड़ेगा और दूसरी तरफ इजरायल से. सऊदी के इजरायल से समझौता होते ही कतर से लेकर इराक और ओमान तक का अब्राहम अकॉर्ड से जुड़ने का संकोच अपने आप ही टूट जाएगा. इस तरह से खाड़ी में ईरान को पूरी तरह अलग-थलग कर कभी-कभार हमले और आर्थिक पाबंदियों के जरिए ट्रंप लगाम रखने पर काम करते दिख रहे हैं.
नेतन्याहू ने किया अमेरिका जाने का ऐलान
इस बीच इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका जाने वाले हैं. अभी कुछ देर पहले उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैं अब अपने मित्र, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए निकल रहा हूं. उनके दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद से यह हमारी आठवीं मुलाकात है, जो किसी भी अन्य अंतरराष्ट्रीय नेता से अधिक है. यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है, और साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी भी. इस मुलाकात में, हम सभी मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिनमें ईरान सबसे अहम है. हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: इजराइल की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उसकी शक्ति को मजबूत करना और हमारे चारों ओर शांति का दायरा बढ़ाना. मैं इजरायल राज्य की सुरक्षा, शक्ति और भविष्य सुनिश्चित करने की गहरी प्रतिबद्धता के साथ इस मिशन पर निकल रहा हूं.’ इस ट्वीट से समझा जा सकता है कि दोनों की नाराजगी समाप्त हो चुकी है.