7 अक्टूबर के नरसंहार और उसके बाद हुए युद्ध के बाद इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले पहले राष्ट्रीय चुनाव से पहले, वोटिंग को प्रभावित करने की विदेशी कोशिशें चिंता का विषय बन गई हैं.
इजरायल में तुर्की सोशल मीडिया के जरिए आगामी चुनावों को मैनेज कर रहा है. ये दावा इजरायल के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने किया है. अधिकारियों के मुताबिक, इन गतिविधियों का मकसद इजरायल की जनता की राय को प्रभावित करना, चुनाव प्रचार में बाधा डालना और इजरायली समाज के अलग-अलग समूहों के बीच मतभेदों को और बढ़ाना है.
खुफिया एजेंसी की भी इनपुट
सोमवार को ‘द जेरूसलम पोस्ट’ को इन अधिकारियों ने बताया कि हालांकि यह नहीं बताया कि क्या यह ऑपरेशन तुर्की सरकार के निर्देश पर चलाया जा रहा है. इस आकलन में तुर्की को ईरान के साथ उन विदेशी ताकतों में शामिल किया गया है, जिन पर इजरायली सुरक्षा अधिकारियों को शक है कि वे चुनाव को प्रभावित करने और इजरायली समाज में फूट का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं. इसके अलावा, यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब इजरायल के सरकारी ब्रॉडकास्टर KAN News की सोमवार की रिपोर्ट के मुताबिक, शिन बेट (इजरायली सुरक्षा एजेंसी) के प्रमुख डेविड जिनी सोमवार को नेसेट (इजरायली संसद) की एक गोपनीय उप-समिति के सामने चुनावों में विदेशी दखल के संकेतों के बारे में जानकारी पेश करने की तैयारी कर रहे हैं.
गुप्त पैसे के लेन-देन का पता लगा रहे
रिपोर्ट के अनुसार, जिनी से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वे सांसदों को इस बारे में जानकारी देंगे कि इजरायल देश के अंदर राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले गुप्त पैसे के लेन-देन का पता कैसे लगा सकता है. केंद्रीय चुनाव समिति के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के डिप्टी प्रेसिडेंट नोआम सोहलबर्ग के भी इस सुनवाई में शामिल होने की उम्मीद है. KAN की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल साइबर डायरेक्टोरेट ने नेसेट (इजरायली संसद) की पिछली सुनवाइयों में बताया था कि चुनाव में दखल देने की कोशिशों के संकेत पहले ही मिल चुके हैं.
राष्ट्रपति इसाक हर्जोग भी चिंतित
7 अक्टूबर के नरसंहार और उसके बाद हुए युद्ध के बाद इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले पहले राष्ट्रीय चुनाव से पहले, वोटिंग को प्रभावित करने की विदेशी कोशिशें चिंता का विषय बन गई हैं. पिछले हफ्ते जिनी और सोहलबर्ग से मुलाकात के बाद, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने चुनाव की निष्पक्षता और अखंडता के लिए खतरों के बारे में चेतावनी दी. हर्जोग ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों से इन खतरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा और इजरायली लोगों से सोशल मीडिया पर जानकारी देखने और शेयर करने में सावधानी बरतने की अपील की.