ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के ताबूत को फाइटर जेट्स की सुरक्षा में मशहद लाया गया. छह दिन तक चले शोक कार्यक्रमों के बाद उन्हें इमाम रज़ा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा. अंतिम संस्कार के बीच क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ा हुआ है.Ali Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का जनाजा गुरुवार को उनके पैतृक शहर मशहद पहुंचा इस तरह उनकी आखिरी विदाई अंतिम चरण में प्रवेश कर गई. पिछले छह दिनों से ईरान और इराक के विभिन्न शहरों में चल रहे शोक समारोहों के बाद अब उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा. इस अंतिम यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि खामेनेई के ताबूत को लेकर जा रहे विमान को सुरक्षा देने के लिए लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) को भी तैनात किया गया. खामेनेई के पार्थिव शरीर के मशहद पहुंचने के दृश्य सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. लाखों समर्थकों के अंतिम दर्शन के लिए जुटने की सूचना है.
फाइटर जेट्स की सुरक्षा में मशहद पहुंचा विमान
खामेनेई के पार्थिव शरीर को लेकर विमान जब पूर्वी ईरान के पवित्र शहर मशहद पहुंचा तो उसकी सुरक्षा के लिए कम से कम एक फाइटर जेट को साथ उड़ते देखा गया. सुरक्षा की यह अभूतपूर्व व्यवस्था क्षेत्र में मौजूद तनावपूर्ण हालात को भी दर्शाती है. विमान के मशहद पहुंचने के बाद शहर में अंतिम संस्कार की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया.
परिजनों के ताबूत भी साथ पहुंचे
खामेनेई के ताबूत के साथ उनके परिवार के उन सदस्यों के ताबूत भी लाए गए जो 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल हमलों में मारे गए थे. बताया गया है कि इनमें उनकी पुत्री, दामाद, नवासी और उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई की पत्नी ज़हरा हद्दाद आदेल भी शामिल हैं. इन ताबूतों को पहले इराक ले जाया गया था, जहां नजफ़ और कर्बला जैसे पवित्र शहरों में बड़े पैमाने पर शोक सभाएं आयोजित की गई थीं.छह दिन तक चला शोक कार्यक्रम
खामेनेई के निधन के बाद तेहरान, क़ोम, नजफ़, कर्बला और अन्य धार्मिक केंद्रों में लगातार छह दिनों तक शोक कार्यक्रम आयोजित किए गए. इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में समर्थकों, धार्मिक नेताओं और राजनीतिक हस्तियों ने भाग लिया. गुरुवार को मशहद में अंतिम संस्कार के साथ इस लंबे शोक कार्यक्रम का समापन होगा.
इमाम रज़ा दरगाह में होगी दफन प्रक्रिया
खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में दफनाया जाएगा, जिसे ईरान का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. इसी परिसर में पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी भी दफन हैं, जिनकी वर्ष 2024 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. इमाम रज़ा शिया समुदाय के बारह इमामों में एकमात्र इमाम हैं जिनकी मजार ईरान में स्थित है.
सड़कों पर उमड़ी समर्थकों की भीड़
मशहद में हजारों समर्थक अंतिम दर्शन के लिए सड़कों पर जुटे. शहर के प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार अंतिम प्रार्थना का नेतृत्व वरिष्ठ धर्मगुरु और आयतुल्लाह हुसैन नूरी हमदानी करेंगे.