राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर महंत गोपाल दास का बयान, पापियों को कड़ी सजा मिले

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास ने कहा कि चढ़ावा चोरों को कड़ी से कड़ी सजा मिले. उन्होंने इस बारे में आज अपना बयान जारी किया है.राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास ने बयान जारी कर कहा कि वो इस घटना से बेहद आहत हैं. उन्होंने कहा कि जिसने भी ये पाप किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी को लेकर पिछले कई दिनों से काफी बवाल मचा हुआ है.

महंत गोपाल दास ने एक बयान जारी कर कहा है कि उन्हें यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी पर पूरा विश्वास है. उन्होंने कहा कि ये दोनों नेता जो भी इस पाप से जुड़ा है उसको सजा जरूर दिलाएंगे. उन्होंने लिखा है कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रश्न है और मेरा निवेदन है कि इसमें किसी भी भी व्यक्ति को अपनी निजी लाभ के लिए राजनीति नहीं करनी चाहिए.

महंत नृत्य गोपाल दासः ट्रस्ट के अध्यक्ष और राम मंदिर आंदोलन के सबसे वरिष्ठ संतों में से एक हैं. वे इस समय अस्वस्थ हैं और अस्पताल में भर्ती हैं, जिसके कारण उनके आज की बैठक में शामिल होने की संभावना कम है.
चंपत रायः वीएचपी के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के महासचिव हैं. अगस्त 2020 में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से वे ही ट्रस्ट के दैनिक कामकाज और प्रशासनिक फैसलों के मुख्य कर्ताधर्ता रहे हैं.
अनिल मिश्राः अयोध्या के जाने-माने होम्योपैथिक डॉक्टर और ट्रस्ट के मूल सदस्यों में से एक हैं, जो मंदिर के प्रशासनिक मामलों की देखरेख कर रहे हैं.
गोविंद गिरि महाराजः पुणे के आध्यात्मिक गुरु हैं, जो ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में वित्तीय मामलों को संभालते हैं.
स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीः प्रयागराज के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं.
स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ जी महाराजः कर्नाटक के उडुपी के पेजावर मठ के 33वें प्रमुख हैं.
युगपुरुष परमानंद गिरि महाराजः हरिद्वार के प्रमुख आध्यात्मिक संत हैं.
महंत दिनेंद्र दासः अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संत हैं, जो मूल विवाद में प्रमुख पक्षकार थे.
कृष्ण मोहनः दलित नेता कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद इस पद पर आरएसएस कार्यकर्ता कृष्ण मोहन को शामिल किया गया था.
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पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं. ट्रस्ट में विभिन्न धार्मिक संतों, अयोध्या राजपरिवार के प्रतिनिधि, चिकित्सक और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है.
दिवंगत कामेश्वर चौपाल के स्थान पर कृष्ण मोहन को ट्रस्ट में शामिल किया गया, जबकि विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद उनकी सीट अभी रिक्त है. आमंत्रित सदस्य अपनी राय दे सकते हैं, लेकिन उन्हें मतदान या प्रशासनिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं.

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