ईरान-US जंग खत्म होते ही एक्टिव हुआ भारत का ‘मिशन मिडिल ईस्ट’, जयशंकर का 6 देशों का दौरा इतना अहम क्यों है?

जंग के बाद बदले हालात में खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना भारत की बड़ी प्राथमिकता है.ईरान-अमेरिका तनाव के शांत होते ही भारत ने पश्चिम एशिया से लेकर यूरोप तक मेगा डिप्लोमैटिक मिशन शुरू कर दिया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर आज यानी 5 जुलाई से 6 देशों के बेहद अहम दौरे पर जा रहे हैं.

यह कोई सामान्य दौरा नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी और लंबी अवधि का असर छोड़ने वाली ठोस रणनीति का हिस्सा है. भारत यह साफ कर चुका है कि पश्चिम एशिया के देशों के साथ उसके संबंध तात्कालिक जरूरतों के लिए नहीं हैं. ये रिश्ते एक गहरी और टिकाऊ साझेदारी पर आधारित हैं.

10 दिनों में 6 देश का दौरा करेंगे जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर 5 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक बहु-देशीय दौरे पर रहेंगे. इस 10 दिवसीय यात्रा को तीन रणनीतिक हिस्सों में बांटा गया है.

पहला चरण में वह खाड़ी देशों में जाएंगे. ये दौरा 5 जुलाई से 10 जुलाई तक चलेगा. जयशंकर अपने दौरे की शुरुआत पश्चिम एशिया के चार प्रमुख देशों से कर रहे हैं. ये देश हैं कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान.विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान वह इन देशों के नेतृत्व और अपने समकक्षों से मुलाकात करेंगे. इस दौरे का मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना है.

खाड़ी देशों का दौरा पूरा करने के बाद विदेश मंत्री अमेरिका के लिए रवाना होंगे. 13 जुलाई को न्यू यॉर्क में एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के कार्यकाल 2028-29 के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे. यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित करने का बड़ा मौका होगा. ये जयशंकर के दौरे के दूसरा चरण होगा.
तीसरा चरण में विदेश मंत्री ब्रसेल्स में भारत-EU बैठक में शामिल होंगे. ये बैठक 14-15 जुलाई को होगी. दौरे के आखिरी चरण में विदेश मंत्री बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स भी पहुंचेंगे.

विदेश मंत्री ब्रेस्लस में तीसरी भारत-EU व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा वह यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों से भी मुलाकात करेंगे.

भारत की दूरदर्शी रणनीति
इस पूरे दौरे को देखकर एक बात तो साफ है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंच कूटनीति का रिसेट बटन दबा चुका है. जंग के थमते ही कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन जैसे देशों की तरफ हाथ बढ़ाना और साथ ही अमेरिका से भारी मात्रा में गैसोलीन का आयात करना यह दिखाता है कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक पकड़ दोनों को एक साथ मजबूत किया है.

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के डेटा से पता चला है कि जून में US भारत का LPG का भी सबसे बड़ा सप्लायर बना रहा है. ये आयात 773.78 हजार मीट्रिक टन (TMT) तक पहुंच गया है. ये आंकड़ा मई से 19.4 प्रतिशत ज्यादा है.

यह कोई जल्दबाजी में उठाया गया कदम नहीं है. यह एक ऐसी दीर्घकालिक बिसात है जो आने वाले वक्त में वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति पहले से कही सुरक्षित और मजबूत कर देगी.

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