ईरान के पास भी बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए… यह बयान ट्रंप ने दिया है

अमेरिका और ईरान में डील साइन हो गई है. उसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलें रखने के पक्ष में आवाज उठाया है.अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते के बीच डोनाल्ड ट्रंप का एक और बड़ा बयान सामने आया है. बयान भी ऐसा कि सुनकर इंसान सोचने लगे कि यह बात उसी शख्स ने कही है जिसने सेना को आदेश देकर चार महीने पहले ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था. दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के पड़ोसी देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान को भी कुछ मिसाइलें रखने की अनुमति होनी चाहिए. राष्ट्रपति ट्रंप ने परमाणु हथियार ले जाने वाली मिसाइलें और सामान्य मिसाइलें (कन्वेंशनल मिसाइल कैपेबिलिटी) के बीच अंतर दिखाया.

फ्रांस की राजधानी पेरिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “मैं कह रहा हूं कि अगर दूसरे देशों के पास ये (बैलिस्टिक मिसाइलें) हैं, तो उनके पास एक भी न हों, यह थोड़ा अनुचित है. अगर सऊदी अरब, कतर और दूसरे देशों के पास कुछ मिसाइलें हैं, तो मैं कहूंगा कि उसी अनुपात में ईरान के पास भी कुछ होना ठीक है.”

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब फ्रांस में दुनिया भर के नेता G7 समिट में वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए जमा हुए थे. यहां ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका जंग को खत्म करने वाले समझौते के बाद भी, कुछ समय तक खाड़ी क्षेत्र में अपनी सेना बनाए रखेगा. ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भी दी कि अगर तेहरान अपने वादों और जिम्मेदारियों का पालन नहीं करता, तो वह फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार हैं.G7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने कहा, “अगर वे ठीक तरह से व्यवहार नहीं करेंगे, तो हम फिर से सीधे उनके ऊपर बम गिराना शुरू कर देंगे.”
अमेरिका और ईरान में समझौता डन
अमेरिका और ईरान ने मिडिल ईस्ट की जंग खत्म करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. वैसे इस समझौते से जुड़ा एक औपचारिक समारोह शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होगा लेकिन ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इसपर साइन कर दिया है. इसके साथ ही 60 दिनों की परमाणु वार्ता शुरू होगी.

यह समझौता ज्ञापन (MoU) उस जंग को खत्म करने के लिए बनाया गया है, जो फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद शुरू हुआ था. इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में भारी अव्यवस्था पैदा कर दी थी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी झटका दिया था. समझौते की खबर सामने आने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही. गुरुवार को तेल की कीमतें 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गईं. खबर लिखे जाने तक अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट नॉर्थ सी कच्चा तेल 2.1 प्रतिशत गिरकर 77.87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था.

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