बिहार की युवा बैटर अक्षरा गुप्ता ने महिला घरेलू क्रिकेट में नए रिकॉर्ड बनाए हैं. गुरुवार को भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड ग्राउंड में BCA महिला U-19 वन-डे ट्रॉफ़ी के शुरुआती मैचों के दौरान, अक्षरा ने नाबाद 306 रनों की ज़बरदस्त पारी खेली और क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया है.बिहार की युवा बैटर अक्षरा गुप्ता ने महिला घरेलू क्रिकेट में एक नया इतिहास रच दिया है.अक्षरा ने भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड ग्राउंड में गुरुवार से शुरू हुए BCA महिला U-19 वन-डे ट्रॉफी टूर्नामेंट में नाबाद 306 रन की तूफानी पारी खेली जिसमें उन्होंने 55 चौके और 8 छक्के लगाए. ऐसा कर 15 साल की अक्षरा गुप्ता ने महिला घरेलू क्रिकेट में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर बनानी वाली दूसरी महिला क्रिकेटर बन गई हैं. बता दें कि . महिला घरेलू क्रिकेट में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर मुंबई की इरा गुप्ता के नाम है,जिन्होंने घरेलू राज्य-स्तरीय मैच में नाबाद 346 रन बनाए थे. उनकी पारी में 42 चौके और 16 छक्के शामिल थे. अक्षरा गुप्ता के नाबाद 306 और इरा गुप्ता के नाबाद 346 रन अब महिला घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर में शामिल हो गए हैं.
बिहार की अक्षरा गुप्ता ने टीम की ओर से खेलते हुए, सिर्फ़ 126 गेंदों पर नाबाद 306 रन बनाए. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 242.86 रहा और वे 233 मिनट तक क्रीज़ पर डटी रहीं. उनकी इस पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल थे. उन्होंने शुरुआत से ही जबरदस्त बल्लेबाजी की और महज 16 गेंदों में ही उन्होंने अर्धशतक पूरा कर लिया और 34 गेंदों में शतक जड़ दिया, जो उनके शानदार स्ट्रोक-प्ले और टाइमिंग को दर्शाता है.
अक्षरा गुप्ता की पारी को देखकर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट हर्षवर्धन ने 15 साल की महिला बैटर को बधाई दी और कहा कि बिहार की महिला क्रिकेटर लगातार राज्य का नाम रोशन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि “BCA खिलाड़ियों के लिए मौके और मंच बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, और इस तरह का प्रदर्शन युवा क्रिकेटरों के लिए एक बड़ी प्रेरणा का काम करता है.”सेक्रेटरी ज़ियाउल अर्फ़िन ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं. उन्होंने BCA महिला U-19 वन-डे ट्रॉफी की शुरुआत में ही ऐसी प्रतिभा के सामने आने को बिहार में क्रिकेट के भविष्य के लिए बहुत अच्छा संकेत बताया और अक्षरा के उज्ज्वल करियर की कामना की.कौन है अक्षरा गुप्ता
बिहार की रक्सौल की रहने वाली अक्षरा गुप्ता ने 14 साल से ही घरेलू मुकाबलों में अपना जौहर दिखाती नजर आ रही हैं. जिसके दम पर उन्हें बिहार की सीनियर महिला टीम में जगह मिली. बता दें कि बीसीसीआई की आयु-श्रेणी टूर्नामेंटों के चारों प्रमुख फॉर्मेट में एक ही सीजन (2024-25) में खेलने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी बन चुकी हैं.
8 साल की उम्र में पहली बार पकड़ा बल्ला
अक्षरा जब केवल 8 साल की थीं तो पहली बार उन्होंने बल्ला पकड़ा था. कोई अकादमी नहीं.. कोई कोच नहीं. बस जुनून, घर के पिछवाड़े में प्रैक्टिस के दम पर अक्षरा ने क्रिकेटर बनने का सपना देखा है. अक्षरा के क्रिकेटर बनने में उनके चाचा का बड़ा हाथ रहा है. अक्षरा अपने चाचा की देखरेख में जमकर प्रैक्टिस किया करती थी. हर दिन पांच घंटे प्रैक्टिस करना उनकी दिनचर्या में शामिल था. गांव में रहकर अक्षरा ने लड़कों के साथ क्रिकेट खेलकर अपने सपने को जीना शुरू किया था. गांव के लड़कों के खिलाफ अक्षरा अपनी बल्लेबाजी से हर किसी को हैरान कर दिया करती थी. उनके पिता गांव में चिकेन की दुकाम चलाते हैं. पिता और चाचा ने मिलकर अक्षरा के सपने को साकार करने की ठानी है.
2024 में बदली किस्मत, परिवार का संघर्ष अब आ रहा काम
अक्षरा के पिता,राज किशोर शाह, रक्सौल में चिकन की दुकान चलाते हैं और उनकी मां रीना देवी एक गृहिणी हैं. शाह ने घर के पास बगीचे में एक नेट लगवाया था ताकि वह रोज प्रैक्टिस कर सके. उनकी मां उन्हें हर सुबह 5 बजे एक गिलास दूध के साथ जगाती थीं, जिसके बाद वह दौड़ने जाती थीं. उनके माता-पिता ने कभी बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया और हमेशा उन्हें बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया. अक्षरा की दो बहनें और एक भाई है. साल 2024 अक्षरा के जीवन में एक अहम मोड़ साबित हुआ. ट्रायल के दौरान, उन्हें बिहार अंडर-19 महिला टीम के लिए चुना गया. इसके कुछ ही समय बाद, 14 साल की उम्र में उन्हें कप्तानी सौंपी गई, जो उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. अब अक्षरा लगातार महिला घरेलू क्रिकेट में तूफानी पारी खेलकर अपने आप को बड़े लेवल पर पहुंचाने की हर संभव कोशिश कर रहीं हैं.
बड़ा भाई बिहार टीम का हिस्सा
अक्षरा के कजिन ऋषभ हमेशा से उनके आदर्श रहे हैं. वह उनसे बड़े हैं और अभी बिहार टीम के लिए खेलते हैं। अपने भाइयों के साथ खेलने से अक्षरा को आत्मविश्वास और अपनापन महसूस हुआ. जब भी महिला खिलाड़ियों के लिए ट्रायल होते थे,तो वह पूरे आत्मविश्वास के साथ वहां जाती थीं.