बंगाल में असली तृणमूल की लड़ाई, पार्टी बचाने को एक्टिव हुईं ममता बनर्जी, विरोधी खेमा झुकने के मूड में नहीं

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी में विद्रोह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. बागी ऋतब्रत बनर्जी खेमा 58 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है. इस बीच ममता बनर्जी भी पार्टी बचाने को खुद एक्टिव हो गई हैं.पश्चिम बंगाल में असली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लेकर लड़ाई दो धड़ों के बीच चल रही है. ऋतब्रत बनर्जी को अभी विधानसभा में नेता विपक्ष बनाया गया है.उन्होंने दावा किया है कि 80 में से 60 टीएमसी के विधायक उनके साथ हैं. ऋतब्रत ने खुद को असली टीएमसी बताते हुए ममता बनर्जी को इस पार्टी का सलाहकार बनाने का प्रस्ताव दिया है. ऋतब्रत चुनाव परिणाम के बाद से ही लगातार विरोधी रुख अपनाए हुए हैं. अब पूर्व सीएम ममता बनर्जी का खेमा इस विरोध से निपटने की तैयारी में जुटा है.

ममता बनर्जी का प्लान
ममता बनर्जी धड़े ने दो तरफा रुख अपनाया है. ममता खेमा विधानसभा अध्यक्ष के ऋतब्रत को विपक्ष का नेता बनाने के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने जा रहा है. इस दौरान पार्टी कोशिश करेगी कि नाराज विधायकों को मनाया जाए और उनसे बातचीत की भी कोशिश चल रही है. टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि ये रणनीति काम भी कर रही है.

टीएमसी के वरिष्ठ विधायक शोभन देब चटर्जी ने एनडीटीवी से कहा कि ऋतब्रत खेमे में गए कई विधायक खुद को नया तृणमूल बता रहे थे अब वो ममता के घर कालीघाट में कॉल कर रहे हैं. वो खुद ही असली तृणमूल में लौटने का आग्रह कर रहे हैं. वो ऋतब्रत के विरोधी नेताओं की लिस्ट को भी खारिज करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष को दिया गया पत्र भी फर्जी था.

शोभन ने दावा किया कि उन्होंने सभी 80 विधायकों को कॉल किया. कई ने मुझसे फोन पर बात की और कुछ विधायक ने मुझे बात नहीं भी की. मैं आपको दावे के साथ कह सकता हूं कि 30 विधायक हमारे साथ हैं. विरोधी खेमे द्वारा अध्यक्ष को दिए गए फर्जी लेटर की भी जांच की जरूरत है. मुझे तो इस पर शंका है कि कितने विधायकों ने सही में उस लेटर पर साइन किया है. विरोधी खेमे के पत्र में ऋतब्रत को विरोधी दल का नेता बनाने की मांग की गई थी. विरोधी खेमे में ही विद्रोह ?
सिग्नेचर राजनीति पर विरोधी खेमे में भी विद्रोह की आहट मिल रही है. ऋतब्रत बनर्जी खेमे के एक विधायक ने कहा कि वो ममता बनर्जी के लिए सलाहकार की भूमिका को स्वीकार नहीं करेंगे. ऋतब्रत ने ममता से अपने खेमे का मुख्य सलाहकार बनने का आग्रह किया है. आम भाषा में कहें तो इसे राजनीति से विदाई जैसा माना जा सकता है.

पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने संभाला मोर्चा
पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने संभाला मोर्चा
पंचाला से टीएमसी विधायक गुलशन मलिक ने साफ कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व को लेकर कोई समझौता नहीं हो सकता है. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि ममता बनर्जी हमारी नेता हैं. हम किसी भी तरह ये नहीं स्वीकार कर सकते हैं कि वो हमारी केवल गाइड बनें. अगर कोई ऐसा कहता है तो वो हमें मंजूर नहीं है. वो हमारी नेतां हैं और इस मुद्दे पर हम सब एक हैं. इस बीच, ऋतब्रत मीडिया में दावा किया कि कई और विधायक भी उनके खेमे में शामिल होंगे. शुक्रवार को टीएमसी के कुछ विधायकों ने संदीपन साहा के आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था. इसमें जावेद खान और प्रसून बनर्जी भी मौजूद थे.

ऋतब्रत ने कहा कि केवल देखिए और इंतजार करिए कि हमारे पास कितने नंबर हैं. गौरतलब है कि 58 विरोधी विधायकों ने जो विधानसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी हैं उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

ममता बनर्जी के घर में बैठक
बाहर चल रहे खटपट के बीच टीएमसी के पुराने नेता ममता बनर्जी के साथ पूरी तरह एकजुट दिख रहे हैं. शुक्रवार को ममता ने कालीघाट में अपने आवास पर टीएमसी की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में कोलकाता के पूर्व मेयर फरहाद हकीम, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, असिमा पात्रा, मदन मित्रा, चंद्रिमा भट्टाचार्य और कुणाल घोष मौजूद थे. ये सभी ममता के करीबी माने जाते हैं. वहीं, 80 में से केवल 8 विधायक ही बैठक में पहुंचे थे. इन विधायकों में कोई भी विरोधी खेमे का नहीं था. इसके बाद टीएमसी ने साफ किया कि उनसे केवल कुछ खास सांसद और विधायकों को ही बुलाया था. इस तरह की खबरें हैं कि विरोधी गुट का ममता बनर्जी को लेकर कोई मनभेद नहीं है बल्कि वो ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी से नाराज हैं. हालांकि, पार्टी ने अभिषेक का समर्थन किया है और वो अभी भी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं. डोला सेना और डेरेक ओ ब्रायन को उनका सहयोगी बनाया गया है.

पार्टी में ताजा फेरबदल में चंद्रिमा भट्टाचार्य को टीएमसी बंगाल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. जबकि माला रॉय को टीएमसी महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है. सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि करीब 20 टीएमसी कांग्रेस सांसद भी बीजेपी के संपर्क में हैं और हो सकता है वो कभी भी पाला बदल लें.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद टीएमसी में लगातार विरोध के स्वर उठ रहे हैं. टीएसमी के विरोध में पार्टी के कई नेता खुलकर सामने आए हैं और भ्रष्टाचार एवं ममता बनर्जी का विरोध किया है. टीएमसी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी पार्टी में विरोध को हवा दे रही है.

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