लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण बिल,नहीं मिल पाया दो तिहाई बहुमत, चाहिए थे 326 वोट मिले सिर्फ 298

लोकसभा में सरकार को दो-तिहाई समर्थन नहीं मिल पाया. लिहाजा महिला आरक्षण से जुड़े तीन बिल लोकसभा में पास नहीं हो सके. शुक्रवार शाम इस बिल पर वोटिंग हुई. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े.लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका. इस बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत चाहिए था. इसे संख्या बल में देखें तो बिल के पक्ष में 326 वोट मिलना चाहिए था. लेकिन बिल के पक्ष के 298 वोट ही मिले. ऐसे में यह बिल पास नहीं सका. वोटिंग के बाद स्पीकर ओम बिरला ने इस बात की जानकारी दी. मालूम हो कि गुरुवार को संसद के विशेष सत्र के पहले दिन इन तीन बिल पर देर रात तक बहस चली, आज शुक्रवार को भी कई घंटे की बहस हुई. जिसके बाद इस पर लोकसभा में वोटिंग हुई. बताया गया कि बिल पर 21 घंटे चर्चा हुई. कुल 130 सांसदों ने अपने विचार रखें इनमें 56 महिला सांसद थीं.

संसद में इन तीन विधेयकों पर हो रही वोटिंगः

संविधान का 131वां संशोधन विधेयक, 2026: लोकसभा की सीटें 850 करने का प्रस्ताव है, राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सीटें हो सकती है.

वोटिंग का नतीजाः संविधान (131वां संशोधन) संशोधन बिल के लिए लोकसभा में कुल 489 वोट पड़े. बिल के पक्ष में 298 वोट, जबकि बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े. बिल पास होने के लिए 326 वोटों की जरूरत थी, ऐसे में यह बिल पास नहीं हो सका.

परिसीमन संशोधन विधेयक, 2026: परिसीमन के लिए जनसंख्या की परिभाषा में बदलाव किया जाएगा. ताकि 2011 की जनगणना को आधारा बनाया जाए.

केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक, 2026: यह विधेयक पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन करता है. ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण बिल लागू हो सकें.

इस बिल को केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में पेश किया.