खामेनेई की हत्या के बाद खौफ में पुतिन, गार्ड्स पर कई पाबंदियां, CCTV भी किया ऑफ

क्रेमलिन का मानना है कि आज का आधुनिक एआई सिस्टम लाखों घंटों के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण पलक झपकते ही कर सकता है. इस इस्तेमाल पुतिन के हाव-भाव समझने, रूट प्लान डिकोड करने के लिए किया जा सकता है.क्या पुतिन को एक बार फिर जान का खतरा है? क्या उन्हें किसी का डर है? कभी दूसरों के लिए चक्रव्यूह रचने वाले पुतिन को अब डर है कि वह खुद किसी के निशाने पर हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, पुतिन को अब आम इंसानों या हथियारों से ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से डर लग रहा है. उन्हें अंदेशा है कि हाई-टेक एआई टूल्स के जरिए उनकी पल-पल की मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है, ताकि उन्हें किसी बड़े हमले या हत्या की साजिश का शिकार बनाया जा सके.

इसी खौफ का नतीजा है कि पुतिन की सुरक्षा में तैनात रहने वाले खास सीसीटीवी नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को कुछ समय के लिए पूरी तरह ऑफलाइन यानी बंद कर दिया गया था. बाद में जब इसे दोबारा शुरू किया गया, तो इंटरनेट से इसका कनेक्शन पूरी तरह काट दिया गया ताकि कोई इसे हैक न कर सके.

ईरान की घटना से बढ़ी क्रेमलिन की बेचैनी
क्रेमलिन के भीतर अचानक पैदा हुए इस डर की सबसे बड़ी वजह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई की हत्या को माना जा रहा है. रूस को लगता है कि ईरान में जो कुछ भी हुआ, उसने मौजूदा सर्विलांस सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है.

मॉस्को का मानना है कि आज का आधुनिक एआई सिस्टम लाखों घंटों के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण पलक झपकते ही कर सकता है. यह तकनीक किसी भी वीआईपी के व्यवहार, उनके काफिले के रूट और सुरक्षा चक्र को आसानी से डिकोड कर सकती है. इससे हाई-प्रोफाइल टारगेट को निशाना बनाना बेहद आसान हो जाता है.

यह डर सिर्फ हवा-हवाई नहीं है, बल्कि रूस के भीतर हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने इसे और पुख्ता कर दिया है. इसी हफ्ते मॉस्को के पास एक कार बम धमाके में रूस के एक सीनियर जनरल की मौत हो गई. पिछले कुछ समय में एक के बाद एक कई सीनियर रूसी सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया है.स्टाफ पर सख्त पाबंदियां
पुतिन ने अपने पर्सनल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को बेहद कड़ा कर दिया है. पुतिन के आसपास रहने वाले स्टाफ, जिनमें उनके पर्सनल बॉडीगार्ड, फोटोग्राफर और यहां तक कि उनका खाना बनाने वाले रसोइये भी शामिल हैं, उन पर बेहद सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं. इन सभी लोगों के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

इतना ही नहीं, पुतिन के बेहद करीब रहने वाले इस स्टाफ को इंटरनेट से चलने वाले किसी भी डिवाइस या गैजेट को इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है. क्रेमलिन को डर है कि इन कर्मचारियों के फोन या डिवाइस के जरिए पुतिन की लोकेशन और उनके डेली रूटीन को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. पुतिन से जुड़े हर अहम ठिकाने की सुरक्षा को भी कई गुना बढ़ा दिया गया है.
आज के दौर में युद्ध का मैदान पूरी तरह बदल चुका है. अब लड़ाई सिर्फ सैनिकों और बारूद की नहीं, बल्कि ड्रोन्स, साइबर वॉरफेयर, सैटेलाइट ट्रैकिंग और एआई-संचालित सर्विलांस की हो चुकी है. एआई के इस दौर में एल्गोरिदम कुछ ही सेकंडों में डेटा के समंदर को खंगाल सकते हैं.

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