22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था. अब पूर्व सीडीएस जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान ने इस ऑपरेशन को लेकर कई अहम बातें बताई हैं.नई दिल्ली:
पहलगाम में कायराना आतंकी हमले का जो अंजाम पाकिस्तान को भुगतना पड़ा था, उसके बारे में उसने शायद कल्पना भी नहीं की होगी. इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ किया था, उससे पाकिस्तान आज तक उबर नहीं पाया है. भारतीय सेना के इस ऑपरेशन को सालभर से ज्यादा हो गए हैं और अब पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई उस मीटिंग की कहानी बताई है, जिसने पाकिस्तान और वहां बैठे आंतकियों की बर्बादी तय कर दी.
मंगलवार को एक कार्यक्रम में जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को एक बैठक ली थी. इसी बैठक में यह तय हो गया था कि हमें पाकिस्तान को एक ‘बड़ा सबक’ सिखाना चाहिए और इसके लिए ‘उनकी सोच के बाहर हो’ वाली कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि भारत सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसे खत्म करना ही होगा.
उन्होंने बताया कि वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े अहम फैसले उस मीटिंग में लिए गए थे, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल और तीनों सेनाओं के चीफ भी मौजूद थे. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को निर्देश दिया था कि ‘इसे अपने हिसाब से करें लेकिन यह सुनिश्चित करें कि नाकामी की कोई गुंजाइश न हो’ और ‘हमारे पास सबूत होने चाहिए.’
क्या हुआ था उस मीटिंग में?
रिटायर्ड जनरल अनिल चौहान ने बताया कि 29 अप्रैल की बैठक में ही यह तय किया गया था कि ताकत का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा. उन्होंने बताया कि शुरुआत में इस बात पर शक था कि क्या हम आधी रात को हमला कर पाएंगे और घने अंधेरे में उन हमलों के सबूत भी जुटा पाएंगे.उन्होंने कहा, ‘हमें अपनी क्षमताओं पर भरोसा था और हमने कहा कि हां, हम आधी रात को ऐसा कर सकते हैं. और इससे हमें सरप्राइज बनाए रखने में मदद मिली.’
रिटायर्ड जनरल अनिल चौहान.
रिटायर्ड जनरल अनिल चौहान.
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उन्होंने बताया, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने हमसे कहा कि इसे तुरंत करने के लिए उन पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे अपने समय पर करें लेकिन ये पक्का करें कि फेल होने का कोई चांस न हो, चाहे वह इंसानी हो या तकनीकी और हम जो भी करें, उसके सबूत हमारे पास होने चाहिए.’
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‘हमें कुछ बड़ा करना होगा’
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के कार्यक्रम में बोलते हुए रिटायर्ड जनरल अनिल चौहान ने बताया कि ’23 से 29 अप्रैल के बीच हमारे बीच कई मीटिंग्स हुईं. चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी की 4-5 बार बैठक हुई और इतनी ही बार NSA के साथ भी बैठक हुई. हम सरकार के पास गए. हमारे पास कई विकल्प थे, जिन पर हमने NSA के साथ चर्चा की थी.’
उन्होंने कहा कि मिलिट्री लीडर्स साफ तौर पर पॉलिटिकल डायरेक्शन चाहते थे और 29 अप्रैल की मीटिंग में यह हमें मिला था.
उन्होंने बताया कि 29 अप्रैल की मीटिंग में ही बहावलपुर को भी टारगेट लिस्ट में शामिल किया गया था. उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के जोर देने पर ऐसा किया गया था, क्योंकि प्रधानमंत्री ने कहा था कि ‘हमें कुछ बड़ा करना होगा.’
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उन्होंने आगे कहा कि ‘यह टारगेट काफी दूर था. फिर भी हमने इसे लिस्ट में रखा. एक बार जब हमने बहावलपुर को टारगेट लिस्ट में शामिल कर लिया तो इसमें हवाई ताकत का इस्तेमाल जरूरी हो गया, क्योंकि लोइटर म्यूनिशन और ड्रोन तक नहीं पहुंच पाते और सफलता की गारंटी नहीं होती.’
टारगेट चुनना सबसे बड़ी चुनौती थी
22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था और 9 आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे. जिन ठिकानों पर हमला हुआ था, उनमें मुरिदके में मरकज तैयबा और बहावलपुर में मरकज सुभानअल्लाह भी शामिल था.
मरकज तैयबा हाफिज सईद के लश्कर-ए-तैयबा और मरकज सुभानअल्लाह मसूद अजहर के जैश-ए-मोहम्मद का ठिकाना था.
पूर्व सीडीएस जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान ने बताया कि ‘टारगेट चुनना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती थी. कुछ आतंकी ठिकाने खाली हो गए थे. कुछ को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया था. इसलिए हमारे इंटेलिजेंस एजेंसियों और हमारी मिलिट्री इंटेलिजेंस के बीच लगातार यह बहस चल रही थी कि किन कैंपों पर हमला किया जाए.’
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उन्होंने कहा कि ‘कोई भी मिलिट्री हर समय 100% तैयार नहीं होती और सभी आर्म्ड फोर्सेस में हमेशा कुछ न कुछ कमियां जरूर होती हैं. दुश्मन के बारे में आपका आकलन कभी पूरा नहीं होता.’ उन्होंने कहा कि दुश्मन के खिलाफ बार-बार एक ही स्ट्रैटजी नहीं अपना सकते.
उन्होंने बताया कि ‘हम सरकार को लगातार बताते रहे कि सरकार जो भी फैसला लेगी, हम उसे लागू करने में सक्षम होंगे, न सिर्फ एक-दो दिन के लिए बल्कि कई दिनों तक.’
100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे
22 अप्रैल को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में घूमने आए पर्यटकों पर गोलीबारी कर दी थी. आतंकियों ने पर्यटकों से उनका धर्म पूछकर उनको गोली मारी थी. ये हमला अब तक का सबसे बर्बर हमला था.
इस हमले के बाद 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया और पाकिस्तान और PoK में बने 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया. ये हमले लश्कर, जैश और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ठिकानों पर हुए. इन हमलों में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे. जैश सरगना मसूद अजहर के कई रिश्तेदार भी इसमें मारे गए थे.
भारतीय सेना के इस ऑपरेशन से बौखलाकर पाकिस्तानी सेना ने भारत पर हमला करने की कोशिश की. लेकिन उसके हर हमले को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया. उल्टा भारत पर हमला करने की कोशिश करना उसे ही भारी पड़ गया. पाकिस्तानी सेना के कई सैन्य ठिकानों को भारतीय सेना ने उड़ा दिया.
चार दिन तक चले संघर्ष के बाद पाकिस्तान की सेना घुटनों पर आ गई. पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर की गुहार लगाई और 10 मई को दोनों के बीच सीजफायर हो गया.