गॉल टेस्ट से पहले ‘5 सूत्रीय मंत्र’ के साथ श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर हमला बोलेगी सिराज एंड कपनी, मॉर्कल का प्लान आया सामने

तीन दिनी वॉर्म-अप मैच में पेसरों के हुए हाल के बाद बॉलिंग कोच को नया प्लान बनाना ही था. सबसे बड़ी वजह गॉल का टर्निंग ट्रैक होना है. यही वजह है मॉर्ने मॉर्कल 5 सूत्रीय प्लान के साथ सामने आए हैं

IND vs SL 1st Test: टीम इंडिया का 80वें स्वंतत्रता  दिवस के मौके पर गॉल में दो टेस्ट मैचों की सीरीज के रूप में बड़ा टेस्ट होने जा रहा है. व्हाइट-बॉल खेलने के कहीं अभ्यस्त हो चुके दिग्गज बल्लेबाज गॉल के टर्निंग और इसके धीमेपन से कैसे निपटेंगे, यही सबसे बड़ा सवाल है. यहां की पिचों पर पेसरों के लिए कितना कुछ है, यह सभी ने तीन दिनी प्रैक्टिस मैच में देखा. और यही वजह है कि बॉलिंग कोच और दक्षिण अफ्रीकी पूर्व लंबू पेसर मॉर्न मोर्कल ने मोहम्मद सिराज एंड कंपनी के लिए 5  सूत्रीय स्पेशल प्लान तैयार किया है. सिराज का दूसरे छोर पर साथी प्रसिद्ध कृष्णा होंगे या गुरनूर बरार, यह तो मैच के सुबह ही पता चलेगा, लेकिन बॉलिंग कोच ने गेंदबाजों के इर्द-गिर्द  साफ खाका जरूर खींच दिया है कि उन्हें क्या करना है. आप बारी-बारी से इस प्लान के बारे में जान लीजिए.

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1. ज्यादा ऊर्जा के साथ छोटे स्पेल, वजह साफ है

मोर्कल ने कोचिंग सेशन में व्हाइट-बोर्ड पर पेसरों के सामने यही प्वाइंट सबसे पहले रखा. पास में समुद्र होने के कारण गॉल में पेसरों की सबसे बड़ी लड़ाई आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) से निपटना है. परेशानी अभी भी आ रही है. और इसकी काट के लिए 5 सूत्रीय प्लान का पहला बड़ा प्वाइंट या पॉलिसी यही है कि पेसरों से छोटे-छोटे स्पेल 4-5 ओवरों में बॉलिंग कराई जाएगी. और साफ कहा गया है कि इन्हीं स्पेलों में अपना सबकुछ झोंक देना है.

2. हिट द डेक हार्ड! (कंधे की ताकत)

बॉलर दो तरह के होते हैं. हवा में स्विंग बोले तो भुवनेश्वर कुमार और हिट द डेक हार्ड (पिच पर कंधे की ताकत का पूरा इस्तेमाल). इससे हवा में सिवंग नहीं मिलती, लेकिन बल्लेबाजों के खिलाफ सीम (टप्पा पड़ने के बाद अंदर-बाहर आना) या उन्हें बैकफुट पर जरूर धकेला जा सकता है. और जब गेंद कुकाबूरा (सीम कम उभरी हुई) हो, तो बेहतर है कि यही रास्ता चुना जाए. और

मॉर्कल ने सिराज सहित तीनों ने साफ-साफ कह दिया है कि शुरुआती ओवरों में ‘स्विंग का रास्ता’ नहीं, बल्कि ‘हिट द डेक हार्ड’ को चुनना है क्योंकि फायदा इसी में है.

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3. कूकाबूरा की गेंद, नरम होने का इंतजार करो!

भारत में टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली SG गेंद की तुलना में कूकाबूरा की गेंद जल्द नरम हो जाती है. वजह यह है कि इसका चमड़ा अलग होता है. और मॉर्कल ने इसके बारे में सिराज एंड कंपनी को बता दिया है कि इस बॉल का ‘बर्ताव’ अलग है. आप इसको लेकर कुछ नहीं कर सकते. यह तुलनात्मक रूप से जल्द ही नरम पड़ जाएगी. इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहो.

4.  क्रीज की चौड़ाई का इस्तेमाल करो

क्रीज की चौड़ाई यानी स्टंप के केंद्र से दाएं और बाएं 8 फीट, 8 इंच (2.64 मीटर) की होती है. इस हिस्से (चौड़ाई) में पॉपिंग या बैटिंग क्रीज या बॉलिंग क्रीज शामिल रहती है. शुरुआत में विकेट चटकाने का एक रास्ता यह भी है कि बॉलर क्रीज की चौड़ाई का इस्तेमाल करें. मतलब क्रीज के कोने से गेंद फेंके. यह विविधता प्रदान करता है, यॉर्कर फेंकने में मदद करता है, वगैरह-वगैरह.

5. रिवर्स स्विंग की ओर निहारो!

बात कहने में आसान है, लेकिन करने में बहुत मुश्किल है. वजह यह भी है कि इसका बड़ा रिश्ता गेंद की  सीम से भी है. और SG गेंद की तुलना में कूकूबूरा बॉल की सीम कहीं कम उभरी होती है. बहरहाल, सिराज एंड कंपनी के पास फायदे की बात यह है कि समुद्र से आने वाली हवा. यह देखने की बात होगी कि यह किस ओर बहती हैं और कितनी तेज गति से. बाकी सिराज अक्सर इसमें सफल रहते हैं, लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा और युवा गुरनूर के बारे में यह कहना जल्दबाजी होगी. वहीं,

रिवर्स हासिल करने के लिए तीनों को ही न  केवल गेंद के कुछ ओवर पुरानी होने का इंतजार करना होगा, बल्कि बाकी बॉलरों और साथियों को इसे बनाना (एक हिस्सा रफ, एक चमकदार) बनाए रखना ही होगा. इतना होने पर रिवर्स मिलेगी? यह देखना होगा. बहरहाल, यह बॉलिंग कोच के प्लान का आखिरी और बड़ा प्वाइंट है.

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