ईरान में छिपा 400 किलो यूरेनियम कैसे आएगा बाहर? ट्रंप की सेना के लिए आसान नहीं होगा ग्राउंड ऑपरेशन

US Iran War: अमेरिका ईरान से करीब 400 किलो शुद्ध किया हुआ यूरेनियम निकालने पर विचार कर रहा है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह काम बेहद जटिल और खतरनाक है लेकिन अगर ऐसा नहीं किया तो ईरान परमाणु हथियार बना लेगा.US Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही अपनी सेना को ईरान के अंदर घुसने और वहां मौजूद लगभग 970 पाउंड (लगभग 400 किलोग्राम) शुद्ध किए गए यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) को लेकर आने का आदेश दे सकते हैं. अमेरिका को डर है कि इन 400 किलो यूरेनियम का उपयोग ईरानी सरकार संभावित रूप से परमाणु हथियार बनाने के लिए कर सकती है. ट्रंप ग्राउंड ऑपरेशन करने का प्लान उस समय बना रहे हैं जब मिडिल ईस्ट की जंग को खत्म करने के लिए क्षेत्रीय वार्ता चल रही है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने ट्रंप की प्लानिंग से परिचित एक सूत्र का हवाला देते हुए रिपोर्ट छापी है.

दूसरी तरफ ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा. यह ऐसा समय है जब हालात और बिगड़ने के संकेत मिल रहे हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिका की 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट पहले ही मध्य पूर्व पहुंच चुकी है. साथ ही, अमेरिकी सेना जमीन पर सैनिक उतारने के विकल्प तैयार कर रही है, जो कुछ दिनों या उससे अधिक समय तक चल सकता है.

ईरान का यूरेनियम और ट्रंप की प्लानिंग
इस पूरे मामले के केंद्र में एक योजना है, जिसमें ईरान से करीब 1,000 पाउंड यूरेनियम निकालने पर विचार किया जा रहा है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह काम बेहद जटिल और खतरनाक है. अधिकारियों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया, “ट्रंप ने अभी यह फैसला नहीं किया है कि आदेश देना है या नहीं. वह यह सोच रहे हैं कि अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के बीच कैसे संतुलन बनाया जाए.

अगर इस ऑपरेशन को मंजूरी मिलती है, तो इसमें विशेष बलों के सैनिक शामिल हो सकते हैं, जो ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच परमाणु ठिकानों को सुरक्षित करेंगे और रेडियोधर्मी सामग्री को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालेंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई छोटा या जल्दी खत्म होने वाला ऑपरेशन नहीं होगा.क्यों आसान नहीं होगा ऑपरेशन
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि ताकत के दम पर यूरेनियम को कब्जे में लेने का कोई भी कदम जटिल और खतरनाक होगा. संभावित ऑपरेशन से ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई शुरू होने की संभावना है और यह युद्ध को ट्रंप की टीम द्वारा सार्वजनिक रूप से बताई गई 4-6 सप्ताह की समय सीमा से भी आगे बढ़ा सकता है.

इसके अलावा, विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन के लिए, अमेरिकी सेना की टीमों को ईरान के परमाणु साइटों में घुसना होगा, संभवतः तेहरान की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और ड्रोन से आग लगने की संभावना है. एक बार साइट पर पहुंचने के बाद, अमेरिकी सैनिकों को सबसे पहले पूरे साइट को सुरक्षित करना होगा. वहां लगे माइंस और बूबी ट्रैप को खत्म करना होगा.

अगर यूरेनियम मिल जाता है, उसे सही सलामत बाहर लाने के लिए एक खास टीम की आवश्यकता होगी. रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक एनरिच किए गए यूरेनियम संभवतः 40 से 50 विशेष सिलेंडरों में मौजूह हैं जो स्कूबा टैंक से मिलते जुलते हैं. किसी तरह की दुर्घटनाओं से बचाने के लिए सिलेंडरों को एक खास तरह के डब्बे (transportation casks) में रखने की आवश्यकता होगी. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक सीनियर रिसर्च स्कॉलर और ईरान के साथ परमाणु वार्ताकार रह चुके रिचर्ड नेफ्यू ने कहा कि यह कदम काफी जगह ले सकता है और कई ट्रक भर सकता है.
इतना ही नहीं यूरेनियम को ईरान से बाहर ले जाने के लिए एक हवाई क्षेत्र की आवश्यकता होगी. यदि कोई उपलब्ध नहीं है, तो उपकरण लाने और परमाणु सामग्री को बाहर निकालने के लिए एक अस्थायी हवाई क्षेत्र स्थापित करने की आवश्यकता होगी. विशेषज्ञों ने कहा कि पूरे ऑपरेशन को पूरा होने में कई दिन या एक सप्ताह का समय लगेगा.