IPL में हाई वोल्टेज ड्रामा ने असंभव को संभव बनाया. धोनी, रोहित, बुमराह, वॉर्न, मलिंगा और PAK खिलाड़ी भी… अंतिम ओवर में जब रोमांच ने हदें पार कर दीं.IPL एक ऐसा प्रीमियर लीग बन चुका है जहां हर साल कुछ ऐसे मुकाबले खेले जाते हैं जिसे देखने वालों की सांसें आखिरी गेंद तक थमी रहती हैं. खास कर जब मुकाबला फाइनल का हो और रोमांच अपनी हदें पार कर रहा हो, तो यह और भी यादगार बन जाता है. आईपीएल के इतिहास में कई ऐसे मैच हुए हैं जिन्होंने ‘लास्ट बॉल थ्रिलर’ के रूप में इस लीग को पहचान बना दी है. चलिए कुछ ऐसे ही मैचों के बारे में बताते हैं जहां करोड़ों फैंस की धड़कनें उसी एक पल पर टिक गईं.
आखिरी ओवर का ऐतिहासिक चेज
इसकी शुरुआत करते हैं 2008 से उस रोमांचक फाइनल से जहां टूर्नामेंट की दो सबसे बेहतरीन टीमें राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपरकिंग्स आपस में टकरा रही थीं और यह मुकाबला आखिरी ओवर में गया. आईपीएल के पहले सीजन के इस फाइनल मुकाबले की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं थी. शेन वॉर्न ने टॉस जीत कर चेन्नई को पहले बल्लेबाजी के लिए उतारा. सुरेश रैना के 43, पार्थिव पटेल के 38 रन और धोनी के नाबाद 29 रनों की बदौलत चेन्नई ने 163 रन बनाए.
जवाब में यूसुफ पठान के जोरदार 56 रनों की बदौलत राजस्थान ने 17 ओवरों तक पांच विकेट पर 139 रन बना लिए थे. लेकिन 17वें ओवर की अंतिम गेंद और 18वें ओवर की पहली और चौथी गेंद पर मोहम्मद कैफ, रवींद्र जडेजा और यूसुफ पठान के आउट होने पर इस मुकाबले ने अचानक धोनी की टीम की ओर अपना रुख मोड़ लिया. अंतिम दो ओवर में जीत के लिए 18 रन चाहिए थे. 19वें ओवर की शुरुआती पांच गेंदों पर केवल पांच रन बने. लेकिन छठी गेंद पर शेन वॉर्न ने चौका जमा दिया.
अब अंतिम छह गेंदों पर आठ रन बनाने थे. धोनी ने 3 ओवरों में 34 रन दे चुके लक्ष्मीपति बालाजी को गेंद थमाई. बालाजी ने भी शुरुआती तीन गेंदें कमाल की डालीं, केवल दो ही रन बनने दिए. यहां जीत के लिए अगली तीन गेंदों पर छह रन चाहिए थे. पर चौथी गेंद को बालाजी ने वाइड डाल दिया, जिस पर दो रन बने. अब नजारा बदल गया, अंतिम तीन गेंदों पर चार रन ही चाहिए थे लेकिन अगली गेंद पर वॉर्न एक रन ही ले सके. अब सामने तनवीर सोहेल थे. बालाजी उन्हें यॉर्कर डालना चाहते थे. लेकिन यह पांचवीं गेंद फुल टॉस हो गई. चेन्नई के खिलाफ टूर्नामेंट में पहली बार बल्लेबाजी कर रहे सोहेल तनवीर ने इसे लॉन्ग लेग की ओर खेल दिया और दो रन लेकर मैच को बराबरी पर ला दिया. अब अंतिम गेंद पर केवल एक रन चाहिए था. तनवीर ने कोई गलती नहीं की और न केवल राजस्थान के लिए बल्कि आईपीएल के लिए एक फेयरीटेल स्टोरी लिख दी.
जब एक गेंद ने बदल दी पूरी कहानी
2017 का फाइनल आईपीएल इतिहास के सबसे लो-स्कोरिंग लेकिन हाई-वोल्टेज मुकाबलों में से एक था. मुंबई इंडियंस vs राइजिंग पुणे सुपरजायंट के इस मुकाबले में मुंबई ने सिर्फ 129 रन बनाए, लेकिन असली ड्रामा आखिरी ओवर में देखने को मिला. हालांकि असली खेल तो बुमराह ने 17वें ओवर में ही सेट कर दिया था, इस ओवर में उन्होंने केवल तीन रन देकर धोनी को आउट किया था. हालांकि पुणे के कप्तान स्टीव स्मिथ विकेट पर जमे हुए थे और इस छोटे से स्कोर को चेज करने में अगले दो ओवरों के दौरान चौका और छक्का जमाते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया था. अंतिम दो ओवरों में 23 रन बनाने थे, 19वें ओवर में स्मिथ ने 12 रन ठोक डाले.
रोहित का पैंतरा
रोहित ने आखिरी ओवर की जिम्मेदारी मिशेल जॉनसन को दी. पुणे को जीत के लिए 11 रन चाहिए थे. सामने थे तिवारी, जिन्होंने अब तक छह गेंदों पर केवल तीन रन बनाए थे. लेकिन जॉनसन की पहली ही गेंद पर तिवारी ने चौका जमा दिया. अगली गेंद को तिवारी फिर लॉन्ग ऑन के ऊपर से मारना चाहते थे लेकिन पोलार्ड ने उन्हें लपक लिया. तीसरी गेंद पर कप्तान स्टीव स्मिथ भी स्वीपर कवर पर अंबाती रायडू के हाथों लपके गए. इस तरह दो गेंदों पर दो विकेट लेकर मिशेल जॉनसन ने मैच पलट दिया. वाशिंगटन सुंदर पिच पर आए. अंतिम तीन गेंदों पर जीत के लिए सात रन चाहिए थे. अगली दो गेंदों पर केवल 3 रन बन सके. आखिरी गेंद पर 4 रन चाहिए थे, लेकिन दो रन लेने के बाद सुंदर रन आउट हो गए और पुणे की जीत का सपना टूट गया. मुंबई ने सिर्फ 1 रन से खिताब जीत लिया.
मैच के बाद रोहित बोले, “मुझे अपने गेंदबाजों पर भरोसा था. तीन ओवर बाकी थे, ऐसे सिचुएशन में वो पहले भी अपना काम कर चुके हैं. वो अपने काम में माहिर हैं. मैंने बस उनसे कहा कि वो जो चाहें वो करें और उसी के हिसाब से फील्ड जमाएं.”
रोहित का ये पैंतरा काम आ गया और टीम चैंपियन बन गई.
आईपीएल का शायद सबसे यादगार फाइनल
2019 का फाइनल मुंबई इंडियंस vs चेन्नई सुपरकिंग्स था. मुंबई ने फिर एक लो स्कोर 149 रन बनाए. रोहित, सूर्यकुमार और ईशान किशन ने मिलकर कुल 53 रन बनाए. हालांकि किरोन पोलार्ड के नाबाद 41 रनों की बदौलत मुंबई की टीम ये स्कोर भी बना पाई. इस लो स्कोर के बावजूद मुंबई के गेंदबाजों जसप्रीत बुमराह, राहुल चाहर और हार्दिक पांड्या ने मिलकर 9 ओवरों में केवल केवल 31 रन ही खर्चे.
एक वक्त ये आ गया था कि चेन्नई को जीतने के लिए 12.40 रन प्रति ओवर चाहिए थे जबकि अभी 5 ओवर बाकी थे. लेकिन शेन वाटसन अकेले दम पर यह मैच चेन्नई की झोली में डालने पर आमदा हो गये. तब तक वो 42 गेंदों पर 42 रन बना कर खेल रहे थे. अगले (16वें) ओवर में वाटसन ने लसिथ मलिंगा की गेंद पर तीन चौके और एक छक्का जमाया.इसके बाद बुमराह आए तो 17वें ओवर में केवल चार रन ही बन सके. फिर 18वें ओवर में क्रुणाल पांड्या की गेंद पर हैट्रिक छक्का जमाकर वाटसन ने पूरे स्टेडियम में सनसनी पैदा कर दी.
मलिंगा से पहले बुमराह का जादू
अंतिम दो ओवरों में केवल 18 रन जीत के लिए चाहिए थे पर बुमराह ने पांच गेंदों पर केवल पांच रन ही बनने दिए, आखिरी गेंद पर बाइ से चार बन बना. वाटसन इस ओवर में केवल एक गेंद ही खेल सके. अब अंतिम ओवर में जीत के लिए चेन्नई को 12 रन बनाने थे. अंगूठा को चूर करने वाले अपने यॉर्कर के लिए मशहूर लसिथ मलिंगा को रोहित ने बुलाया और उन्होंने निराश नहीं किया. शुरुआती चार गेंदें यॉर्कर डालीं. वाटसन को चलता किया. पांचवीं गेंद पर दो रन बने और मैच आखिरी गेंद तक पहुंच गया. यहां केवल दो रन जीत के लिए चाहिए थे और मलिंगा ने एक बार फिर शानदार यॉर्कर डाली और शार्दुल ठाकुर एलबीडब्ल्यू आउट करार दिए गए. इसी के साथ मुंबई ने एक बार फिर सिर्फ 1 रन से रोमांचक फाइनल जीत लिया. ये आईपीएल के इतिहास की शायद सबसे यादगार जीत थी.
मलिंगा से पहले हार्दिक को 20वां ओवर देने की सोच रहे थे रोहित
मैच के बाद रोहित ने बताया कि वो 20वां ओवर हार्दिक को देने की सोच रहे थे, हालांकि उन्होंने ये स्पष्ट किया कि वो किसी ऐसे को चुनना चाहते थे जिसने पहले भी टीम के लिए ऐसा किया हो. मलिंगा पहले भी ऐसा कर चुके थे, तो यह चयन बहुत मुश्किल फैसला नहीं रहा. फिर वो मलिंगा के बारे में बोले कि चैंपियन यही करते हैं. तीसरा ओवर खराब डालने के बावजूद मुझे उन पर पूरा यकीन था. उन्हें खुद भी भरोसा था कि वे ये कर सकते हैं.
फिर जब बारिश से बाधित 2023 के फाइनल मुकाबले में रवींद्र जडेजा ने आखिरी दो गेंदों पर एक छक्का और एक चौका लगाकर चेन्नई को उसका पांचवां खिताब दिलाया तो धोनी ने जडेजा को गले लगाया और खुशी में उन्हें उठा लिया. तब ये पिक्चर और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुआ था.
ये तो फाइनल मुकाबलों की बात है लेकिन ऐसे कई मुकाबले और भी खेले गए हैं जिनमें अंतिम ओवर निर्णायक होता रहा है. आईपीएल की सबसे बड़ी खासियत यही रही है कि यहां आखिरी गेंद तक कुछ भी तय नहीं होता. 1 रन से जीत, आखिरी गेंद पर विकेट, असंभव लगने वाला चेज और गेंदबाज की दमदार वापसी जैसे कारनामे यहां गाहे-बगाहे होते हैं. तब ही ये दुनिया के सबसे रोमांचक क्रिकेट लीग में तब्दील हो गया है जिसके कारनामों के चर्चे न केवल टूर्नामेंट के दरम्यान, बल्कि कई सालों बाद तक होते हैं.