India vs New Zealand Final: भारत और न्यूजीलैंड के बीच फाइनल मुकाबले की पिच को लेकर खुलासा हो गया है. और इस पिच की अपनी ही एक यूएसपी है.IND vs NZ Final: पिछले करीब एक महीने से भारत और श्रीलंका के अलग-अलग मैदानों पर खेले जा रहे T20 World Cup 2026 का सबसे बड़ा मुकाबला यानी भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जाने वाला फाइनल रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एकदम सिर पर सवार है. करोड़ों भारतीय फैंस सहित दुनिया के तमाम फैंस मेगा फाइनल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. दोनों ‘सेनाएं’ पूरी तरह से तैयार हैं! कुछ सवाल दोनों के लिए ही अपनी-अपनी जगह हैं, जिनका जवाब टॉस के समय या मैच के दौरान मिलेगा. लेकिन मेगा मुकाबले की पिच को लेकर जरूर खुलासा हो गया है. जानिए कि खिताबी जंग की पिच कैसी होगी, यह कैसा बर्ताव करेगी, इसकी USP (खास बात), इसका असर क्या होगा..वगैरह…वगैरह.
सेंटर पिच: काली और लाल मिट्टी की
जानकारी के अनुसार भारत vs न्यूजीलैंड फाइनल मुकाबला मोदी स्टेडियम की सेंटर पिच पर खेला जाएगा. यह पिच काली और लाल दोनों ही मिश्रित मिट्टी से बनी है. और यही इस पिच की यूएसपी यानी खास बात भी है कि इसे दोनों ही तरह की मिट्टी से मिलाकर बनाया गया है. वैसे जहां तक इसके स्वभाव की बात है, तो यह बहुत हद तक वानखेड़े स्टेडियम की तरह पिच तेज गेंदबाजों के लिए मददगार रहेगी. पेसरों को इस मिश्रित मिट्टी की पिच से अच्छा बाउंस मिलेगा. उम्मीद की जा रही है कि यहां भी दो सौ के आस-पास स्कोर बन सकता है क्योंकि समय गुजरने के साथ ही यहां बैटिंग करना आसान होगा, लेकिन अब जबकि पिच दोनों ही तरह की मिट्टी की है और एक ही मैच खेला गया है, तो काफी हद तक इसका स्वभाव छिपा हुआ है, जो दोनों ही टीमों के लिए जिज्ञासा का विषय है.
लगभग नई पिच: विश्व कप में एक ही मैच खेला गया
अब जबकि सेंटर पिच पर एक ही मैच खेला गया है, तो दोनों ही टीमों के लिए यह पिच बहुत हद तक नई होगी. यहां घरेलू टीम इंडिया जरूर इस पिच के बारे में तुलनात्मक रूप से बेहतर जानती है. जहां तक वर्ल्ड कप की बात है, तो इस पर एक ही मैच खेला गया. यह मुकाबला 9 फरवरी को कनाडा और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया था. शाम को खेले गए इस मैच में दक्षिण अफ्रीका ने पहल बैटिंग करते हुए 213 रन बनाए थे और 53 रन से जीत दर्ज की थी.
पिच ऐसे करेगी मैच में बर्ताव
लाल और काली मिट्टी यानी मिश्रित मिट्टी से बनी पिच सख्त और टिकाऊ होती है. यहां शुरुआत में पेसरों को अच्छी उछाल और पेस मिलती है. स्पिनरों के लिए घुमाव ज्यादा नहीं होगा, लेकिन गेंद ग्रिप जरूर होगी. मतलब टप्पा खाने के बाद रुक कर आएगी. असर यह होगा कि शुरुआती पाली में स्पिनरों के खिलाफ शॉट को टाइम करना उतना आसान नहीं ही होने जा रहा. लेकिन समय गुजरने के साथ ही इस पिच पर बैटिंग आसान होती जाएगी.