रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल- रुह कंपा देंगे दोनों तरफ हुई तबाही के आंकड़े

Russia-Ukraine War 4 Years: रूस-यूक्रेन के बीच 4 साल की जंग में लाखों लोगों की मौत हो चुकी है और करोड़ों अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं. इस डेटा स्टोरी में जानिए संघर्ष ने जमीन, जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा असर डालारूस और यूक्रेन के बीच जंग को शुरू हुए आज ठीक 4 साल गुजर गए हैं. 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू किया और इसके साथ ही यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा और विनाशकारी युद्ध शुरू हो गया था. 4 साल बाद यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच की लड़ाई नहीं रह गया है. यह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाला संकट बन चुका है. लाखों लोगों की मौत हो चुकी है और करोड़ों अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं. चलिए इस डेटा स्टोरी में जानते हैं कि इस लंबे संघर्ष ने जमीन, जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा असर डाला है.

मौतें
संयुक्त राष्ट्र ने 2022 से अब तक यूक्रेन में 15,000 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत की पुष्टि की है. असली संख्या इससे ज्यादा हो सकती है, क्योंकि रूस के कब्जे वाले इलाकों, जैसे मारीउपोल की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती. यूक्रेन के जवाबी हमलों में रूस के सीमावर्ती इलाकों में भी सैकड़ों लोग मारे गए हैं. अगर सैनिकों की मौत की बात करें तो दोनों देश अपने सैनिकों की मौत के सही आंकड़े नहीं बताते हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनके 55,000 सैनिक मारे गए हैं, लेकिन माना जाता है कि असली संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है.

वहीं रूस ने सितंबर 2022 के बाद अपने सैनिकों की मौतों का कोई नया आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया है. BBC और रूसी वेबसाइट मेडियाजोना ने कम से कम 1,77,000 रूसी सैनिकों की मौत की पुष्टि की है, लेकिन असली संख्या इससे ज्यादा हो सकती है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज का अनुमान है कि 2022 से अब तक 3,25,000 तक रूसी सैनिक और 1,00,000 से 1,40,000 यूक्रेनी सैनिक मारे गए हो सकते हैं.
यूक्रेन की राजधानी कीव में जंग के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं (AFP)
यूक्रेन की राजधानी कीव में जंग के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं (AFP)
विस्थापन
यूक्रेन के अनुसार, करीब 20,000 बच्चों को जबरन रूस के कब्जे वाले इलाकों से हटाया या अगवा किया गया है. वहीं संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) के मुताबिक करीब 59 लाख यूक्रेनी शरणार्थी विदेशों में रह रहे हैं और 37 लाख लोग देश के अंदर ही विस्थापित हैं.

तबाही
इस युद्ध से यूक्रेन में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है. पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन के कई शहर, जैसे बाखमुत, तोरेत्स्क और वोवचांस्क पूरी तरह खंडहर बन गए हैं. WHO के अनुसार 2022 से अब तक स्वास्थ्य केंद्रों पर 2,800 से ज्यादा हमले हुए हैं. रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से लाखों लोगों की बिजली और हीटिंग बंद हो गई. UN की माइन एक्शन सर्विस के मुताबिक, यूक्रेन का लगभग पांचवां हिस्सा बारूदी सुरंगों या फटे बिना पड़े बमों से दूषित है.रूसी कब्जा
इंस्टिट्यूट फॉर स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार फरवरी 2026 के मध्य तक रूस ने यूक्रेन के लगभग 19.5 प्रतिशत इलाके पर कब्जा कर लिया है. इसमें से करीब 7 प्रतिशत इलाका क्रीमिया और पूर्वी डोनबास का हिस्सा है जो जंग शुरू होने से पहले से ही रूस के कब्जे में था. पिछले साल रूस की बढ़त 2022 के बाद सबसे ज्यादा रही, लेकिन शुरुआत के महीनों की तुलना में अब उसकी रफ्तार धीमी हो गई है.

अर्थव्यवस्था को मिली चोट
इस युद्ध ने यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया और रूस की अर्थव्यवस्था पर भी भारी दबाव डाला है. रूस ने सैन्य खर्च बढ़ाकर जीडीपी का करीब 9 प्रतिशत कर दिया है. पिछले साल उसकी अर्थव्यवस्था सिर्फ 1 प्रतिशत बढ़ी.

यूक्रेन के ड्रोन अटैक से मॉस्को की बिल्डिंग में तबाही (AFP)
यूक्रेन के ड्रोन अटैक से मॉस्को की बिल्डिंग में तबाही (AFP)
यूक्रेन की अर्थव्यवस्था हमले के बाद एक साल में लगभग एक-तिहाई घट गई. अब उसकी सरकार रोजमर्रा के खर्च के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और दूसरे विदेशी कर्जदाताओं पर निर्भर है.

जंग खत्म कब होगी
कूटनीतिक प्रयास अभी भी जारी हैं. जनवरी और फरवरी 2026 में रूसी, यूक्रेनी और अमेरिकी प्रतिनिधि अबू धाबी और जेनेवा में मिले. रूस अब भी मांग कर रहा है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र से पूरी तरह हट जाए. जबकि यूक्रेन इसे बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट मानता है. रूस चाहता है कि यूक्रेन को पश्चिमी देशों से सैन्य मदद न मिले. यूक्रेन का कहना है कि अगर वह झुकेगा तो भविष्य में फिर हमला हो सकता है, और यह उसके संविधान और जनता के लिए स्वीकार नहीं है. कुल मिलाकर अभी बस जंग ही जंग है, शांति की उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आती.

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