जियाउर- खालिदा की विरासत बचा पाएंगे बेटे तारिक? बांग्लादेश चुनाव में सबसे आगे चल रही BNP के इतिहास में है जवाब

Bangladesh Election 2026: कहानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की, जो अपनी सबसे कद्दावर नेता खालिदा जिया के गुजरने के बाद अपने इतिहास की संभवतः सबसे अहम चुनाव लड़ रही है. पहली बार होगा जब बांग्लादेश के राजनीतिक अखाड़े में दो बेगमों की लड़ाई नहीं होगी.Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में संसदीय चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने जा रहे हैं. यह अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद देश में पहला चुनाव होगा. यह चुनाव तय करेगा कि बांग्लादेश में लोकतंत्र किस रास्ते पर जाने वाला है. भारत के ठीक पड़ोस में होने की वजह से नई दिल्ली सरकार की नजर इस चुनाव पर बड़े करीब से होगी. हसीना के 16 सालों के शासन के बाद इसबार के चुनाव में उनकी पार्टी अवामी लीग रेस में नहीं है. उसे पहले ही चुनाव में बैन कर दिया गया है. इस बार मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन में है.

बांग्लादेश चुनाव से पहले हम आपके लिए यह सीरिज लाए हैं जिसमें हम आपको मैदान में दांव ठोक रहे एक-एक राजनीतिक प्लेयर्स के बारे में बताएंगे. उनका अतीत बताएंगे, उनका वर्तमान बताएंगे. चुनाव में कितनी मजबूत स्थिति है, यह बताएंगे.

आज बात करेंगे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की, जो अपनी सबसे कद्दावर नेता खालिदा जिया के गुजरने के बाद अपने इतिहास की संभवतः सबसे अहम चुनाव लड़ रही है. कई दशकों में ऐसा पहली बार होगा जब बांग्लादेश के राजनीतिक अखाड़े में दो बेगमों की लड़ाई नहीं होगी. कमान अब खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के पास है जो 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं और चुनावी मैदान में हैं.
1978 में पड़ी नींव
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का गठन 1978 में जियाउर रहमान द्वारा किया गया था, जो उस समय बांग्लादेश के राष्ट्रपति थे. 1971 में स्वतंत्रता के बाद, बांग्लादेश पर ज्यादातर अवामी लीग का शासन था. लेकिन बांग्लादेश में एक ऐसा भी तबका था जो आर्थिक समस्याओं और एक-दलीय शासन से नाखुश था. जियाउर रहमान ने “बांग्लादेशी राष्ट्रवाद” के रूप में नई राजनीतिक पहचान पेश करने के लिए BNP बनाई, जो राष्ट्रीय एकता, इस्लामी सांस्कृतिक मूल्यों और बहुदलीय लोकतंत्र पर केंद्रित थी. पार्टी ने मुक्त-बाजार अर्थव्यवस्था और पश्चिमी और मध्य पूर्वी देशों के साथ घनिष्ठ संबंधों का समर्थन किया. 1981 में जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई, लेकिन पार्टी बची रही और बढ़ती रही.

जियाउर की मृत्यु के बाद, बांग्लादेश जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद के नेतृत्व में सैन्य शासन के अधीन चला गया. इरशाद ने 1982 के तख्तापलट में सत्ता पर कब्जा कर लिया था. इस दौरान, BNP एक विपक्षी पार्टी बन गई और इसका नेतृत्व जियाउर रहमान की पत्नी खालिदा जिया ने किया. BNP ने सैन्य शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1990 में इरशाद को पद छोड़ना पड़ा और लोकतंत्र बहाल हुआ. फिर 1991 का चुनाव BNP ने जीता और खालिदा जिया प्रधान मंत्री बनीं. वो बांग्लादेश की पहली महिला पीएम बनीं. उनकी सरकार ने निजीकरण, लोकतंत्र और राजनीति में सैन्य प्रभाव को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया.BNP ने 1996 और 2001 में बांग्लादेश पर फिर से शासन किया, लेकिन सत्ता में रहने के दौरान उसे अवामी लीग के साथ मजबूत प्रतिद्वंद्विता मिली. वह वक्त लगातार होती राजनीतिक हिंसा के लिए जाना जाता था. 2006 के बाद, BNP को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसमें उसके नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आए. 2009 से, BNP ज्यादातर विपक्ष में रही जबकि अवामी लीग ने देश पर शासन किया. लेकिन 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद कहानी बदल गई है. अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से बैन कर दिया गया है और खालिदा जिया का भी निधन हो चुका है.

खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नए अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल बाद वापस बांग्लादेश आए हैं. आते ही उन्होंने पार्टी में जान फूंक दी है. उनकी यह वापसी न केवल BNP, बल्कि देश की राजनीति के लिए भी अहम मानी जा रही है.
चुनावी रेस में सबसे आगे है BNP
इस चुनाव में मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा जेन जेड से है. इसी के विद्रोह ने शेख हसीना को कुर्सी से हटाया है. बांग्लादेश के युवा ही अगले प्रधान मंत्री का फैसला करेंगे. अभी कई जेन जेड वोटर BNP के राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं, विशेष रूप से पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान के रूप में नया उम्मीद देख रहे हैं. दिसंबर में किए गए एक ओपिनियन सर्वे में BNP को लगभग 70 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि उसके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात ए इस्लामी को केवल 19 प्रतिशत समर्थन मिला. यह सर्वे एक गैर-सरकारी संगठन एमिनेंस एसोसिएट्स फॉर सोशल डेवलपमेंट (ईएएसडी) ने कराया था. एक प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म इनोविजन कंसल्टिंग द्वारा किए गए एक दूसरे सर्वे से पता चला है कि 47 प्रतिशत से अधिक लोग अब तारिक रहमान के प्रधान मंत्री बनने की संभावना देखते हैं. वहीं, 22.5 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि जमात के प्रमुख प्रधानमंत्री बनेंगे.