इधर पाकिस्तान में वार्ता और उधर होर्मुज में ईरान की बिछाई माइन्स पर ट्रंप ने कर दिया बड़ा दावा

ईरान और अमेरिका एक दूसरे पर शांति वार्ता के साथ-साथ लगातार दबाव बनाए हुए हैं. ट्रंप ईरान पर दबाव बनाने के लिए लगातार सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं या उन्होंने कुछ तय कर रखा है…अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि मध्य पूर्व युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू होने के साथ ही अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को “साफ” करना शुरू कर दिया है. ईरान की तरफ से ये दावा किया गया था कि होर्मुज में उसने माइन्स बिछा दी हैं, जिससे जहाजों के पार करने पर उनमें विस्फोट होने का खतरा रहेगा.

क्या कहा ट्रंप ने
ट्रंप की यह टिप्पणी तब आई जब अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस ने रिपोर्ट किया कि कई अमेरिकी नौसेना के जहाजों ने शनिवार को ईरान के साथ समन्वय किए बिना जलडमरूमध्य को पार किया. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा, “हम अब होर्मुज जलडमरूमध्य को साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं,” और इसे चीन, जापान और फ्रांस जैसे देशों पर एक एहसान बताया, जिनमें “यह काम स्वयं करने का साहस या इच्छाशक्ति नहीं है.” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संघर्ष में ईरान “भारी नुकसान उठा रहा है!”, साथ ही यह भी स्वीकार किया कि रणनीतिक जलडमरूमध्य में ईरानी खदानें – जिससे होकर दुनिया के कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा गुजरता है – अभी भी खतरा बनी हुई हैं.

ईरान का आया जवाब
वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दावा किया है कि अमेरिकी नेवी के डेस्ट्रॉयर शिप ने होर्मुज पार करने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान के कड़े प्रतिरोध की वजह से उसे वापस लौटना पड़ा. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिकी सेना के डेस्ट्रॉयर शिप फुजैरा से होर्मुज स्ट्रेट की तरफ बढ़ रहा था. उसे आगे बढ़ते देख ईरानी सेना ने कड़ी वॉर्निंग दी कि अगर उसने आगे बढ़ने की कोशिश की तो उसके ऊपर हमला कर दिया जाएगा. इसके बाद अमेरिकी जहाज वापस लौट गया. ट्रंप क्यों कर रहे ऐसा
अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर बमबारी शुरू करने के बाद से ईरान के तट से दूर स्थित प्रमुख समुद्री मार्ग को तेहरान ने लगभग अवरुद्ध कर दिया है, हालांकि जलडमरूमध्य को फिर से खोलना इस सप्ताह की शुरुआत में लागू किए गए अस्थिर युद्धविराम की एक शर्त थी. आज पाकिस्तान में ईरान और पाकिस्तान में युद्ध समाप्त करने को लेकर बात हो रही है. इस बीच इस तनातनी को अमेरिका का ईरान पर दबाव बनाने का जरिया भी समझा जा रहा है. हालांकि, युद्ध जब शुरू हुआ था, तब भी अमेरिका और ईरान में वार्ता ही चल रही थी. ऐसे में अमेरिका को लेकर कुछ भी पक्का नहीं कहा जा सकता.